क्रिप्टो करेंसी ठगी मामले में एसआईटी की बड़ी कार्रवाई, दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

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कांगड़ा:हिमाचल प्रदेश में क्रिप्टो करेंसी ठगी मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी को बड़ी सफलता मिली है। एसआईटी ने मामले के तीन मुख्य आरोपियों में से दो को गिरफ्तार कर लिया है। एसआईटी के अनुसार मामले में तीन मुख्य आरोपी शामिल हैं। आरोपियों में सुभाष शर्मा, सुखदेव ठाकुर, हेमराज ठाकुर और अन्य शामिल हैं। सभी आरोपी हिमाचल के बताए जा रहे हैं। इनमें से दो मुख्य आरोपियों हेमराज और सुखदेव को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पूछताछ के लिए उनका पुलिस रिमांड लिया जा रहा है। एसआईटी के अनुसार जो भी व्यक्ति मामले में कोई जानकारी साझा करना चाहता है, वह डीआइजी उत्तरी रेंज धर्मशाला में संपर्क कर सकता है।

26 सितंबर को क्रिप्टो करेंसी ठगी मामलों की जांच के लिए अभिषेक दुल्लर डीआइजी-एनआर धर्मशाला अध्यक्षता में 13 सदस्यों वाले विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। एसआईटी को राज्य में क्रिप्टो करेंसी के ठगी मामले को लेकर बड़े पैमाने पर जांच करने के निर्देश दिए गए। एसआईटी को क्रिप्टो करेंसी से जुड़े मामलों की वित्तीय समेत पेशेवर और निष्पक्ष जांच करने के भी निर्देश दिए गए थे। 24 सितंबर को पुलिस स्टेशन पालमपुर में पंजीकृत मामले की जांच के दौरान क्रिप्टो करेंसी निवेश से जुड़ी वित्तीय धोखाधड़ी योजनाएं पाई गई हैं।

ऐसे होती थी निवेशकों से ठगी
इस अपराध में निवेशकों को लुभाने के लिए उच्च रिटर्न के वादे और अतिरंजित दावों के साथ कोरवियो कॉइन नामक नकली क्रिप्टो करेंसी का प्रचार शामिल है। आरोपियों पर अपने फायदे के लिए क्रिप्टो करेंसी की कीमतों में हेरफेर करने का आरोप है, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ। आरोपियों ने नई क्रिप्टो करेंसी, डीजीटी कॉइन और बीटीपीपी टोकन पर भी स्विच किया, जिससे निवेशकों को नुकसान हुआ।  इसके अलावा शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जब निवेशकों ने रिफंड मांगा या असंतोष व्यक्त किया तो आरोपियों ने धमकियां दीं। आरोपियों पर संभावित साक्ष्य मिटाने के लिए क्रिप्टो करेंसी से संबंधित ऑनलाइन रिकॉर्ड और वेबसाइटों को हटाने का भी आरोप है। आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं। इन अपराधों के लिए 10 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है।

शिकायतकर्ताओं को 18 करोड़ से अधिक का नुकसान
इस ठगी से शिकायतकर्ताओं ने सामूहिक रूप से 18 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान की सूचना दी है। यदि और लोगों, निवेशक इस संबंध में आगे आते हैं तो होने वाला नुकसान बढ़ने की संभावना है। एसआईटी के अनुसार क्रिप्टो करेंसी धोखाधड़ी की योजना वर्ष 2018-19 में शुरू हुई और लगभग तीन वर्षों तक जारी रही। ऐसे 10 मामले एसआईटी ने उठाए हैं। 50 से अधिक शिकायतों की जांच चल रही है।  इसमें शामिल राशि बहुत बड़ी है।

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