मोहाली के वेव एस्टेट में CAM शुल्क और स्विमिंग पूल की सुविधा को लेकर निवासियों का विवाद

वेव एस्टेट में समाधान या सुनियोजित आईवॉश? 1800 परिवारों के करोड़ों डकार कर स्विमिंग पूल पर साधी चुप्पी; ‘यहां का निवासी होने के नाते सच बोलना मेरा फर्ज ही नहीं, मेरा धर्म है’

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​सुरेंद्र राणा, निवासी एवं ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
​मोहाली / चंडीगढ़ न्यूज़ रूम:

मोहाली के सेक्टर 85 और 99 स्थित पॉश रिहायशी प्रोजेक्ट ‘वेव एस्टेट’ में सीएएम (कॉमन एरिया मेंटेनेंस) शुल्कों में मनमाने इजाफे और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर चल रहा विवाद अब आर-पार की लड़ाई का रूप ले चुका है। 13 अक्टूबर को कंट्री कॉलोनाइजर्स के सीईओ समीर और उनकी प्रबंधन टीम के साथ वेव एस्टेट रेजिडेंट्स फेडरेशन (WERF) तथा विभिन्न ब्लॉकों—वेव गार्डन्स (जी+2 और एस+4 प्रोजेक्ट्स)—के 11 प्रतिनिधियों की आमने-सामने बैठक हुई। लेकिन इस बैठक के जो नतीजे सामने आए हैं, उसने सीधे तौर पर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह वाकई समस्याओं के समाधान की ईमानदार कोशिश थी या फिर 15 अक्टूबर को प्रस्तावित तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस को टलवाने के लिए रचा गया एक सुनियोजित कॉरपोरेट आईवॉश (दिखावा)?


​‘यहां का निवासी होने के नाते 1800 परिवारों के लिए बोलना मेरा फर्ज और धर्म है’
​इस पूरे मामले पर ‘पंजाब दस्तक’ के ब्यूरो चीफ और इसी सोसाइटी के निवासी सुरेंद्र राणा ने दो-टूक और दिल की गहराइयों से अपनी बात रखी:
​”लोग पूछ सकते हैं कि मैं खुद क्यों बोल रहा हूं और इतना खुलकर क्यों सामने आ रहा हूं? तो मैं साफ कर दूं—पत्रकारिता तो अपनी जगह है, लेकिन सबसे पहले मैं वेव एस्टेट का एक बाशिंदा हूं। यहां का निवासी होने के नाते अपने 1800 परिवारों के हक, उनके पसीने की कमाई और उनके सम्मान के लिए आवाज उठाना मैं सिर्फ अपना फर्ज ही नहीं, बल्कि अपना सबसे बड़ा धर्म समझता हूं! आज अगर मैं चुप रहूं, तो यह अपने आप से धोखा होगा और अपनी ही छत के नीचे रह रहे इन 1800 मासूम परिवारों के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा। इसलिए सच को उजागर करना मेरी अंतरात्मा की आवाज है, और मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं।”


— सुरेंद्र राणा, निवासी एवं ब्यूरो चीफ
​स्विमिंग पूल पर प्रबंधन के होंठ क्यों सिले? 1800 परिवारों के 20 से 30 करोड़ कहां गए?
​बैठक का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू स्विमिंग पूल का मुद्दा रहा। जब प्रतिनिधियों ने अधूरे पड़े स्विमिंग पूल पर सीधा जवाब मांगा, तो प्रबंधन बगलें झांकने लगा और इस पर पूरी तरह चुप्पी साध ली।
​हैरानी की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट में रहने वाले हर निवासी—प्लॉट धारक से लेकर फ्लैट मालिकों तक—ने क्लब और सुविधाओं के नाम पर 75 हजार से लेकर 2 लाख रुपये तक की भारी-भरकम अग्रिम रकम प्रबंधन के पास जमा करवाई है।


​सीधा हिसाब: यदि वेव एस्टेट के लगभग 1800 परिवारों का औसत हिसाब लगाया जाए, तो यह राशि 20 से 30 करोड़ रुपये के पार बैठती है!
​जनता का तीखा सवाल: जब पाई-पाई जनता की लगी है, खून-पसीने की कमाई से करोड़ों रुपये का फंड खड़ा किया गया, तो आज सालों बीत जाने के बाद भी निवासियों और बच्चों को स्विमिंग पूल की सुविधा क्यों नहीं मिल सकी? प्रबंधन के पास इस पर कोई जवाब क्यों नहीं था? क्या यह सीधे तौर पर जनता के पैसे का खुला दुरुपयोग नहीं है?


​’समय मांगना’ प्रबंधन का पुराना हथकंडा: क्या चोर दरवाजे से आंदोलन दबाने की चाल?
​कॉरपोरेट मैनेजमेंट की यह जानी-पहचानी रणनीति होती है कि जब जनता का आक्रोश चरम पर पहुंचे और मीडिया में बात जाने वाली हो, तो तुरंत एक बैठक बुलाकर ‘समय’ मांग लो। 13 अक्टूबर की बैठक में भी ठीक यही स्क्रिप्ट दोहराई गई:
​सर्विस मैट्रिक्स पर टालमटोल: फेडरेशन ने दो-टूक कहा कि जब तक सर्विस मैट्रिक्स पर हस्ताक्षर नहीं होते, बढ़ी हुई सीएएम दरें किसी सूरत में नहीं दी जाएंगी और पुरानी दरों पर ही भुगतान होगा। इस पर सीईओ ने ‘सोचने का समय’ मांग लिया।
​50-50 कमेटी पर चुप्पी: ‘द रिट्रीट’ और वेव गार्डन्स क्लब हाउस में कंपनी और निवासियों की बराबर भागीदारी वाली संयुक्त कमेटी के मुद्दे पर भी बिना किसी तय डेडलाइन (समय-सीमा) के गेंद को आगे सरका दिया गया।
​अकाउंट्स ऑडिट का झुनझुना: खातों की जांच के लिए 3-4 निवासियों को शामिल करने की बात कहकर मामले को केवल कागजी उलझनों में उलझाने की कोशिश की गई।


​जब सच आपके साथ था, तो प्रेस कॉन्फ्रेंस टली क्यों?
​बैठक के बाद 15 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस को फिलहाल स्थगित करने की घोषणा हुई। लेकिन वेव एस्टेट के गलियारों में यही चर्चा गूंज रही है कि:
यदि प्रबंधन सच्चा और पारदर्शी था, तो वह बैठक में ही दूध का दूध और पानी का पानी क्यों नहीं कर सका?
और यदि निवासी अपने हक पर पूरी तरह सही थे, तो फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों रोकी गई?
​प्रेस कॉन्फ्रेंस टलने से सीधा फायदा सिर्फ और सिर्फ प्रबंधन को मिला है, जिसने अपनी सार्वजनिक फजीहत और मीडिया के तीखे सवालों से बचने के लिए कीमती समय खरीद लिया।


​जनता की अदालत में सीधा सवाल: आपकी क्या राय है?
​यह लड़ाई सिर्फ एक पत्रकार या फेडरेशन की नहीं, बल्कि हर उस आम नागरिक की है जो बिल्डर लॉबी की मनमानी और कॉरपोरेट चालबाजियों का शिकार हुआ है।
​क्या 1800 परिवारों के करोड़ों रुपये का हिसाब मांगे बिना प्रेस कॉन्फ्रेंस टालना सही था?
​क्या बुनियादी सुविधाओं के बिना बढ़ी हुई मेंटेनेंस की वसूली जायज है?


​वेव एस्टेट के 1800 परिवार अब इस आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। निवासियों का साफ कहना है कि स्विमिंग पूल, क्लब संचालन में बराबरी का हक, पारदर्शी ऑडिट और सर्विस मैट्रिक्स के बिना एक भी नया पैसा मेंटेनेंस के नाम पर नहीं दिया जाएगा।


​इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार खुलकर साझा करें।
​देखते रहें ‘पंजाब दस्तक’ — सच की आवाज़!
जनता के खून-पसीने की कमाई और कॉरपोरेट मनमानी के खिलाफ हमारी बेबाक रिपोर्टिंग बिना किसी समझौते के जारी रहेगी।

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