शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूप और घटस्थापना पूजा

कश्मीर से कन्याकुमारी तक गूंजे आदिशक्ति के जयकारे: पूरे भारतवर्ष में शारदीय नवरात्र का महापर्व शुरू, जानिए मां के 9 स्वरूपों की महिमा और संपूर्ण पूजन विधान

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​ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा | पंजाब दस्तक
चंडीगढ़:
सनातन संस्कृति और अटूट आस्था का सबसे बड़ा पर्व शारदीय नवरात्र आज से समूचे भारतवर्ष में पूरी श्रद्धा, गरिमा और भव्यता के साथ शुरू हो गया है। उत्तर में हिमालय की वादियों से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी के छोर तक, और पूर्व के शक्तिपीठों से लेकर पश्चिम के आस्था केंद्रों तक, देश का कोना-कोना आज मां भगवती की भक्ति के अलौकिक रंग में सराबोर है। सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार आज घर-घर और देवालयों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच घटस्थापना कर आदिशक्ति की नौ दिवसीय साधना का संकल्प लिया गया।


​देशभर में शक्ति साधना के विविध रंग: एक आस्था, अनेक उत्सव
​भारतवर्ष के हर भूभाग में नवरात्र का उल्लास अपनी अनूठी सांस्कृतिक पहचान के साथ नजर आता है:
​उत्तर भारत: हिमाचल के शक्तिपीठों, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मंदिरों में अखंड ज्योतियां प्रज्वलित हो चुकी हैं।
​गुजरात और पश्चिमी भारत: गरबा और डांडिया के लोकनृत्यों के साथ मां अंबा की आराधना का शुभारंभ हो चुका है।
​पूर्वी भारत: बंगाल, असम और ओडिशा में दुर्गा पूजा के भव्य पंडालों और मां महिषासुरमर्दिनी के दिव्य स्वरूप का स्वागत हो रहा है।
​दक्षिण भारत: दक्षिण के राज्यों में ‘बोम्मु कोलू’ और नवदुर्गा की पारंपरिक उपासना से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।


​शास्त्रोक्त घटस्थापना: दिशा, सामग्री और सरल विधान
​नवरात्र साधना का सबसे पहला और अनिवार्य चरण है घटस्थापना, जिसे ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में स्थापित करना सर्वाधिक मंगलकारी माना गया है:
​पवित्र वेदी व जवारे: पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़ककर मिट्टी के पात्र में स्वच्छ मिट्टी बिछाएं और उसमें जौ (जवारे) बोएं।
​कलश तैयारी: तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाएं और कंठ पर मौली (कलावा) बांधें। उसमें शुद्ध जल, गंगाजल, सुपारी, अक्षत, सिक्का और दूर्वा डालें।
​पल्लव और श्रीफल स्थापना: कलश के मुख पर आम या अशोक के पांच पत्ते सजाएं। एक जटाधारी नारियल को लाल चुनरी या कलावा में लपेटकर कलश के ऊपर पूर्ण श्रद्धा से स्थापित करें।
​अखंड ज्योति व संकल्प: गाय के घी या तिल के तेल का दीपक जलाकर मां के सामने हाथ में अक्षत, जल और पुष्प लेकर नौ दिवसीय व्रत और साधना का संकल्प लें।


​नवदुर्गा के 9 दिव्य स्वरूप: महिमा और आध्यात्मिक प्रभाव
​नौ दिन मां के नौ विशिष्ट स्वरूपों की उपासना से साधक के जीवन के समस्त विकार समाप्त होते हैं:
​1. मां शैलपुत्री: हिमालय राज की कन्या, जो साधक को जीवन में दृढ़ संकल्प, स्थिरता और अडिग आस्था का वरदान देती हैं।
​2. मां ब्रह्मचारिणी: कठोर तपस्या की प्रतिमूर्ति, जिनकी साधना से व्यक्ति में संयम, त्याग, ज्ञान और वैराग्य का उदय होता है।
​3. मां चंद्रघंटा: मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाली वीर स्वरूपा, जो जीवन से भय, संशय और मानसिक अशांति को समाप्त करती हैं।
​4. मां कुष्मांडा: अपने मंद हास्य से ब्रह्मांड को रचने वाली आदिशक्ति, जिनकी कृपा से समस्त असाध्य रोग दूर होकर आयु और आरोग्य मिलता है।


​5. मां स्कंदमाता: भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को अंक में लिए वात्सल्यमयी मां, जो भक्तों को ज्ञान, बुद्धि और संतान सुख प्रदान करती हैं।
​6. मां कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट हुईं असुरविनाशिनी, जो हर प्रकार के संघर्ष और अन्याय पर विजय का आशीष देती हैं।
​7. मां कालरात्रि: घने अंधकार सा विग्रह और प्रचंड तेज, जो हर प्रकार के संकट, शत्रु-बाधा और नकारात्मक ऊर्जा का संहार करती हैं।
​8. मां महागौरी: पूर्णतः श्वेत, सौम्य और करुणामयी स्वरूप, जिनकी आराधना से जन्म-जन्मांतर के पाप मिटते हैं और आंतरिक शांति मिलती है।
​9. मां सिद्धिदात्री: कमल पुष्प पर आसीन, समस्त आठों सिद्धियों और नौ निधियों की प्रदाता, जो साधक के सभी मनोरथ सिद्ध करती हैं।


​साधना के नियम: आत्म-संयम, जप और कन्या पूजन
​सात्विक जीवन: नवरात्र केवल भोजन के त्याग का नाम नहीं, बल्कि आचरण की शुद्धि है। इन दिनों असत्य, कटु वचन, क्रोध और नकारात्मक सोच से दूर रहें।
​नित्य पाठ: दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
​कन्या पूजन और पूर्णाहुति: अष्टमी अथवा नवमी तिथि पर नौ कन्याओं और एक बटुक (लंगूर) की पूजा कर, उन्हें भोग लगाकर आशीर्वाद लेना ही नवरात्र अनुष्ठान की संपूर्णता है।
​देखते रहें पंजाब दस्तक, सच की आवाज़ पंजाब दस्तक।

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