विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
चंडीगढ़ (पंजाब दस्तक): दिवाली के ऐन मौके पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राज्य के करीब 8 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने का ऐलान किया है। सरकार की ओर से इसे त्यौहार का बड़ा “दिवाली तोहफ़ा” करार देते हुए कर्मचारियों को प्रशासन की रीढ़ की हड्डी बताया गया। लेकिन, सरकारी दावों के पीछे की ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि खुशियों के इस त्यौहार पर मान सरकार ने उनके हक का 10 फीसदी DA दबाकर उनके साथ सीधा-सीधा छलावा किया है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान के मुताबिक यह 3% बढ़ा हुआ DA कर्मचारियों को 1 दिसंबर को मिलने वाली नवंबर की तनख्वाह के साथ जोड़कर दिया जाएगा, जिससे कर्मचारियों के खाते में कुल ₹788 करोड़ आएंगे। जिस 3% DA को मान सरकार दिवाली गिफ्ट बताकर पेश कर रही है, वह दरअसल 1 जुलाई 2023 से पेंडिंग पड़ा हुआ था। सरकार का दावा है कि 18 सितंबर को दिए गए 8% DA और अब 3% को मिलाकर दो महीनों में कुल 11% DA बढ़ाया गया है, जिससे सरकारी खजाने पर सालाना ₹3,988 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार जब 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी थी तब DA 28% था, जो अब बढ़कर 53% पहुँच गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि DA के अलावा कर्मचारियों की बाकी मांगों के लिए सरकार के दरवाज़े हमेशा खुले हैं।
मुख्यधारा मीडिया भले ही इसे बड़ा तोहफ़ा गा रहा हो, लेकिन मुलाज़िम जत्थेबंदियों और पेंशनरों में इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बीते दिन ही 8 अप्रैल और 3 अगस्त के अदालती आदेशों को लागू न करने पर पंजाब के मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस (Contempt Notice) थमाया था और सख्त टिप्पणी की थी कि सरकार अपने ही कर्मचारियों के हक पर डाका डाल रही है। कर्मचारियों के मुताबिक कुल 13% DA बकाया था, जिसमें से महज़ 3% देकर 10% DA रोक लिया गया है। पेंडिंग DA की किस्तों में 1 जनवरी 2025 से 2%, 1 जुलाई 2025 से 3%, 1 जनवरी 2026 से 2% और 1 जुलाई 2026 से केंद्र द्वारा जारी 3% DA शामिल है। इसके अलावा सरकार ने पेंडिंग पड़े DA के एरियर (बकाए) के भुगतान को लेकर भी पूरी तरह खामोशी साध ली है।
दिवाली पर राज्य भर के कर्मचारी आस लगाए बैठे थे कि ‘आप’ सरकार अपने बड़े चुनावी वादों पर कोई फैसला लेगी, मगर सरकार हर मोर्चे पर खामोश रही। 18 नवंबर 2022 को पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाली का नोटिफिकेशन जारी करने के बावजूद आज तक इसे ज़मीन पर लागू नहीं किया गया और 17-07-2020 का पत्र रद्द करने का मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के बाद भी आज कोई ऐलान नहीं हुआ। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने 71,777 नौकरियां दी हैं, लेकिन सच यह है कि 15-01-2015 की नोटिफिकेशन के तहत नए भर्ती कर्मचारियों को पहले 3 साल केवल मुधली तनख्वाह (बेसिक पे) ही मिलती है—न कोई DA, न इंक्रीमेंट, जिसे कर्मचारी 3 साल का आर्थिक शोषण करार दे रहे हैं।
इसके अलावा कच्चे, आउटसोर्स व डेलीवेज़ कर्मचारियों को पक्का करने, छठे वेतन आयोग के तहत पेंशनरों के 2.88 गुणांक लाभ और चुनाव से पहले आंगनवाड़ी, आशा वर्कर व मिड-डे मील वर्करों का मानभत्ता दोगुना करने के वादों पर भी कोई फैसला नहीं लिया गया।
अदालती आदेशों के बावजूद पूरा DA न देना, एरियर दबाना और बुनियादी मांगों को ठंडे बस्ते में डालना मान सरकार के लिए आने वाले दिनों में बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के इस आधे-अधूरी राहत वाले फैसले के बाद पंजाब के कर्मचारी और पेंशनर संगठन अपनी कानूनी और मैदानी लड़ाई को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं।
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