शिमला/चंडीगढ़
विशेष रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा
शिमला: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय गुप्ता को नियमित मुख्य सचिव नियुक्त किए जाने के साथ ही अब हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में 1 जून से कमान संभालने वाले अगले मुख्य सचिव को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है। चूंकि संजय गुप्ता इसी महीने 31 मई को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, ऐसे में इस सर्वोच्च पद की दौड़ में चंबा के रहने वाले और वर्तमान में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ओंकार शर्मा (1994 बैच) का नाम सबसे आगे चल रहा है।

बेहद ईमानदार छवि और ट्राइबल-दूरदराज क्षेत्र का प्रतिनिधित्व
प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि सरकार ओंकार शर्मा के नाम पर बेहद गंभीरता से विचार कर रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उनकी बेहद ईमानदार और बेदाग छवि है। इसके साथ ही, वे हिमाचल प्रदेश के बेहद दूर-दराज और ट्राइबल (जनजातीय) पृष्ठभूमि वाले चंबा जिला से संबंध रखते हैं। एक पिछड़े और कठिन क्षेत्र से निकलकर प्रशासनिक सेवाओं के शीर्ष तक पहुंचने वाले ओंकार शर्मा को अगर यह कमान मिलती है, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा गौरव होगा।
2027 के विधानसभा चुनाव और सरकार का सियासी गणित
इस संभावित नियुक्ति को साल 2027 में होने वाले हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव से ठीक पहले सरकार एक ऐसे चेहरे को मुख्य सचिव की कुर्सी पर बैठाना चाहती है, जिसकी जनता और कर्मचारियों के बीच छवि बिल्कुल साफ हो। चंबा जैसे दूर-दराज क्षेत्र के एक ईमानदार अधिकारी को प्रदेश की सबसे बड़ी प्रशासनिक कमान सौंपकर सरकार पूरे प्रदेश, खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में एक बड़ा और सकारात्मक राजनीतिक संदेश भी दे सकती है। यही वजह है कि सरकार ओंकार शर्मा के नाम पर अंतिम मुहर लगा सकती है।

संजय गुप्ता जैसी ही कड़क कार्यप्रणाली, तुरंत फैसले लेने में माहिर
सचिवालय और नौकरशाही के भीतर ओंकार शर्मा की चर्चा उनके काम करने के खास अंदाज को लेकर भी हो रही है। उनकी कार्यप्रणाली भी निवर्तमान मुख्य सचिव संजय गुप्ता जैसी ही मानी जाती है। ओंकार शर्मा को भी ‘क्विक डिसीजन मेकर’ यानी तुरंत फैसला लेने वाला प्रशासनिक अधिकारी माना जाता है।
वे फाइलों को दबाकर रखने या मामलों को अटकाने के सख्त खिलाफ हैं। मीटिंग्स में त्वरित निर्णय लेना और जनहित से जुड़े फैसलों को तुरंत लागू करवाना उनकी पहचान रही है। ओंकार शर्मा ने अपने लंबे सेवाकाल में कई महत्वपूर्ण विभागों को कुशलता से संभाला है और वे प्रदेश की भौगोलिक व प्रशासनिक परिस्थितियों को बेहद गहराई से समझते हैं।
1 जून से नई कमान को लेकर कयासों का दौर
संजय गुप्ता की नियमित नियुक्ति के बाद अब सरकार 1 जून से प्रदेश की नौकरशाही की कमान किसे सौंपेगी, इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है। रेस में कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के नाम होने के बावजूद, ओंकार शर्मा की ईमानदारी, चंबा का प्रतिनिधित्व और ‘फटाफट फैसला’ लेने की कार्यशैली के कारण उनका पलड़ा सबसे भारी नजर आ रहा है। फिलहाल, सचिवालय के गलियारों में इस नाम को लेकर चर्चाएं पूरी तरह से गर्म हैं।
