पंजाब दस्तक / उमांशी राणा
हमीरपुर (वरिष्ठ पत्रकार):
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय ‘किसाऊ बांध परियोजना’ को लेकर अब प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और कांग्रेस इसे अपनी उपलब्धि बता रहे हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इसे सिरे से नकारते हुए तीखा पलटवार किया है।
हमीरपुर में मीडिया से मुखातिब होते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू को इस परियोजना का श्रेय लेने की इतनी भी क्या जल्दबाजी है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यह विशाल परियोजना लगभग छह दशकों तक कांग्रेस के राज में ठंडे बस्ते में धूल फांकती रही।
’सबका साथ, सबका विकास’ और सशक्त विजन की जीत
अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह परियोजना देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन—’सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’—का जीता-जागता प्रमाण है। जिस जटिल अंतर-राज्यीय मसले को छह दशकों तक पिछली सरकारों ने उलझाकर रखा, उसे मोदी सरकार ने मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और सहकारी संघवाद के माध्यम से सर्वसम्मति बनाकर सुलझाया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद ही हिमाचल और उत्तराखंड को एक मंच पर लाया गया और वर्ष 2017 में ‘किसाऊ कॉरपोरेशन’ का गठन कर अटकी पड़ी फाइलों को रफ्तार दी गई। इसके साथ ही, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कुशल और संवेदनशील मध्यस्थता के चलते छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली—के मुख्यमंत्रियों को एक टेबल पर लाकर यह ऐतिहासिक समझौता अमलीजामा पहन सका।
केंद्र उठा रहा है 90% खर्च, राज्यों को मिला बड़ा संबल
सांसद अनुराग ठाकुर ने विस्तार से बताया कि केंद्र की मोदी सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के ‘जल घटक’ (वाटर कॉम्पोनेंट) का 90 प्रतिशत वित्तीय खर्च स्वयं वहन करने का बड़ा फैसला लिया है, जिससे सहभागी राज्यों के कंधों से भारी आर्थिक बोझ हट गया है।
परियोजना के मुख्य लाभ और प्रभाव:
स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन: परियोजना के तहत टोंस नदी पर विशाल कंक्रीट बांध का निर्माण होगा, जिससे प्रतिवर्ष करीब 1,379 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा होगी। इसका सीधा आर्थिक व विकासात्मक लाभ हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की जनता को मिलेगा।
सिंचाई और पेयजल संकट से मुक्ति: परियोजना से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। साथ ही दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बड़े हिस्से को वर्षों तक भरपूर पेयजल उपलब्ध होगा।
यमुना का संरक्षण: इस विशाल जलाशय से निकलने वाला जल यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को नया जीवन देगा, जिससे जल संवर्धन के राष्ट्रीय संकल्प को मजबूती मिलेगी।
केवल फोटो खिंचवाने और श्रेय लूटने की राजनीति छोड़ें: अनुराग
मुख्यमंत्री पर कड़ा तंज कसते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि जब पूरा खाका, केंद्रीय समन्वय और 90 प्रतिशत की वित्तीय हिस्सेदारी केंद्र सरकार ने सुनिश्चित की है, तो यह किसी एक मुख्यमंत्री की निजी उपलब्धि कैसे हो सकती है? उन्होंने कहा, “सुक्खू जी केवल फोटो खिंचवाने और क्रेडिट लेने की राजनीति बंद करें। प्रदेश और देश की जनता भली-भांति देख रही है कि धरातल पर काम किसने किया है और अब सिर्फ श्रेय लूटने की होड़ में कौन आगे खड़ा है।”
पंजाब दस्तक का सियासी विश्लेषण:
किसाऊ परियोजना पर हुए इस ऐतिहासिक समझौते के बाद हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस—दोनों ही दल इस मील के पत्थर का पूरा श्रेय अपने-अपने पाले में खींचने की होड़ में जुटे हैं। जहां कांग्रेस इसे अपनी कूटनीतिक जीत करार दे रही है, वहीं भाजपा इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ नेतृत्व और कुशल केंद्र सरकार के प्रयासों की जीत बता रही है। अब जनता की अदालत में यह देखना दिलचस्प होगा कि श्रेय की इस सियासी जंग में किसका दावा भारी पड़ता है।
ऐसी ही निष्पक्ष और सटीक ग्राउंड रिपोर्ट देखने के लिए देखते रहें ‘पंजाब दस्तक—सच की आवाज़’।

