विशेष रिपोर्ट: भेषज, पंजाब दस्तक
धर्मशाला:
हिमाचल प्रदेश में गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों को लेकर चल रही तमाम भ्रांतियों और आशंकाओं पर पूर्ण विराम लगाते हुए प्रदेश की संवेदनशील सरकार ने ऐतिहासिक व जनहितैषी निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की कुशल कार्यशैली के तहत राज्य सरकार ने न केवल केंद्र सरकार के निर्धारित कोटे की बीपीएल योजना को पूर्ववत जारी रखने का संकल्प दोहराया है, बल्कि लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई यानी ‘ग्राम सभा’ को उसकी असली ताकत वापस लौटा दी है।
अब बीपीएल सूची में नए पात्र परिवारों को जोड़ने और अपात्रों की निष्पक्ष छंटनी का अंतिम अधिकार पूरी तरह ग्राम सभा के पास होगा। सरकार के इस कदम से वास्तविक जरूरतमंदों का हक सुरक्षित रहेगा और अफसरशाही के बजाय जनता के चुने मंच से न्याय सुनिश्चित होगा।
अपात्रों की छंटनी और नए नामों पर ग्राम सभा की मुहर अंतिम, सभी उपायुक्तों को कड़े निर्देश
सरकार ने बीपीएल सूची में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ग्राम सभा की भूमिका को सर्वोपरि और निर्णायक बना दिया है। इस संबंध में ग्रामीण विकास विभाग ने प्रदेश के सभी उपायुक्तों (DCs) को स्पष्ट और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
19 मार्च 2025 के निर्देशों में व्यापक संशोधन: ग्रामीण विकास विभाग ने सभी डीसी को निर्देशित किया है कि 19 मार्च 2025 को जारी पत्र और उसके बाद समय-समय पर जारी किए गए सभी आदेशों को इस नए फैसले के तहत ही संशोधित माना जाए।
सत्यापित लाभार्थियों पर आंच नहीं: 19 मार्च 2025 से शुरू हुई परिवार पहचान प्रक्रिया के तहत जिन परिवारों का सत्यापन पहले ही पूरा हो चुका है, उन्हें केवल नई प्रक्रिया के आधार पर बीपीएल सूची से बाहर नहीं किया जाएगा। उनकी स्थिति पूरी तरह यथावत बनी रहेगी।
जनता की संसद यानी ग्राम सभा का फैसला सर्वोपरि: अब किसी भी परिवार को बीपीएल सूची में शामिल करने या अपात्र पाए जाने पर हटाने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ ग्राम सभा के पास होगा, जिससे किसी भी निर्धन परिवार के साथ अन्याय न हो।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का विजन: 2 अक्टूबर से शुरू होगी ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’
प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक बार फिर साबित किया है कि सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती यानी 2 अक्टूबर से राज्य सरकार अपने स्तर पर अति निर्धन परिवारों के लिए महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ का विधिवत शुभारंभ करने जा रही है।
इसके लागू होते ही 2 अक्टूबर के बाद हिमाचल में निर्धन परिवारों के लिए दो अलग-अलग कल्याणकारी व्यवस्थाएं समानांतर रूप से काम करेंगी—एक ओर केंद्र के कोटे वाली बीपीएल व्यवस्था जारी रहेगी, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार की यह विशेष लक्षित सामाजिक सुरक्षा योजना लागू होगी।
300 यूनिट मुफ्त बिजली: योजना के तहत चयनित पात्र परिवारों को प्रति माह 300 यूनिट निशुल्क बिजली का संबल प्रदान किया जाएगा।
मातृशक्ति का सम्मान, ₹1500 मासिक सहायता: परिवार में 21 से 59 वर्ष आयु वर्ग की प्रत्येक पात्र महिला को प्रतिमाह 1500 रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जाएगी।
20 सितंबर तक आवेदन का अवसर: इस जनहितैषी योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन प्रक्रिया अंतिम चरण में है और पात्र परिवार 20 सितंबर तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं।
ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट की स्थिति
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि हिमाचल में बीपीएल योजना निर्बाध रूप से जारी रहेगी और बीपीएल सूची में किसी भी प्रकार की मनमानी कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार का मूल ध्येय हर गरीब तक उसका हक पहुंचाना और पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त बनाना है। 2 अक्टूबर का दिन प्रदेश के गरीब परिवारों के लिए दोहरी राहत और सशक्तिकरण का नया सवेरा लेकर आएगा।
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