विशेष रिपोर्ट: काजल (शिमला न्यूज़ रूम)
पंजाब दस्तक ब्यूरो
शिमला: देश भर के राज्य परिवहन निगमों के कथित निजीकरण की कोशिशों पर रोक लगाने और परिवहन कर्मचारियों की लंबे समय से लटकी मांगों को लेकर अब कर्मचारियों ने निर्णायक जंग का बिगुल फूंक दिया है। भारतीय मजदूर संघ (BMS) से संबद्ध ‘भारतीय परिवहन मजदूर महासंघ’ के देशव्यापी आह्वान पर हिमाचल परिवहन मजदूर संघ 21 सितंबर को बड़ा कदम उठाने जा रहा है।
संघ की प्रदेश कार्यसमिति के पदाधिकारी 21 सितंबर को हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के प्रबंध निदेशक (MD) से मुलाकात करेंगे और उनके माध्यम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक विस्तृत मांग पत्र व ज्ञापन सौंपेंगे।
निजीकरण पर रोक और लंबित मांगों को लेकर एकजुटता
बात करें राज्य परिवहन निगमों की, तो उनके निजीकरण पर पूर्ण विराम लगाने और कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग को लेकर हिमाचल परिवहन मजदूर संघ 21 सितंबर को यह महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपने जा रहा है। भारतीय परिवहन मजदूर महासंघ के आह्वान पर पूरे देश में एक साथ इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि केंद्र से लेकर राज्य सरकारों तक परिवहन कर्मियों का साझा आक्रोश और मांगें पहुंचाई जा सकें।
इसी कड़ी में हिमाचल में संघ की प्रदेश कार्यसमिति के सभी प्रमुख पदाधिकारी 21 सितंबर को सीधे हिमाचल पथ परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक के समक्ष उपस्थित होकर यह मांग पत्र प्रस्तुत करेंगे।
देशव्यापी आंदोलन की रूपरेखा, दिल्ली में गूंजेगी आवाज
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन केवल कागजों और ज्ञापनों तक सीमित नहीं रहने वाला है:
21 सितंबर को एक साथ ज्ञापन: देश के सभी राज्यों में राज्य परिवहन निगमों के प्रबंध निदेशकों व शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तक आवाज पहुंचाई जाएगी।
निजीकरण पर पूर्ण रोक की मांग: राज्य परिवहन निगमों के रूटों, बसों और बुनियादी सेवाओं को निजी हाथों में सौंपने की नीतियों को तुरंत वापस लेने की मांग रखी गई है।
कर्मचारियों के हकों की सुरक्षा: आउटसोर्स कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करने, लंबित वित्तीय देनदारियों का भुगतान करने और वेतन-भत्तों से जुड़े मामलों के तत्काल निपटारे पर जोर दिया गया है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की हुंकार: संघ ने दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि ज्ञापन सौंपे जाने के बाद भी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में देश भर के परिवहन कर्मचारी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन जनता की जीवनरेखा है और इसे बचाने के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेंगे।
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