कांगड़ा-चंबा में विकास कार्य ठप, प्रशासनिक लचरता से जनता परेशान

​कांगड़ा और चंबा में प्रशासनिक लचरता: विकास कार्य ठप, जनता त्रस्त

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पंजाब दस्तक
​ब्यूरो रिपोर्ट: भेषज (वरिष्ठ पत्रकार)
​धर्मशाला/चंबा, 2 जून: कांगड़ा और चंबा जिले इन दिनों विकास की बाट जोह रहे हैं। प्रशासनिक उदासीनता, भ्रष्टाचार और चुनाव बाद उपजी राजनीतिक खींचतान के बीच आम नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद से सत्ता के गलियारों में जो बदलाव आया है, उसका सीधा असर धरातल पर दिख रहा है और शासन-प्रशासन की सुस्ती से लोगों में भारी रोष है।


​कांगड़ा-धर्मशाला: अव्यवस्था का केंद्र
धर्मशाला में निकाय चुनाव के बाद से प्रशासन की कार्यप्रणाली पूरी तरह सुस्त पड़ गई है, जिससे शहर के विकास कार्य ठप हैं। कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया फाइलों में ही दम तोड़ रही है। स्मार्ट सिटी के तहत धर्मशाला में सीवरेज का काम अधूरा रहने से जगह-जगह सड़कें खुदी पड़ी हैं। कांगड़ा के नुरपूर और देहरा ब्लॉक में पेयजल किल्लत से लोग भीषण गर्मी में परेशान हैं। टांडा मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की भारी कमी से मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। नगर निगम के वार्डों में सफाई व्यवस्था बदहाल है। ज्वालामुखी और बैजनाथ ब्लॉक में सरकारी स्कूलों में भवन निर्माण कार्य अधर में हैं। पालमपुर और शाहपुर के ग्रामीण इलाकों में बिजली के जर्जर तारों से जान का खतरा बना हुआ है। कांगड़ा में अवैध खनन माफिया बेखौफ होकर नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं। मनरेगा के तहत भुगतान में हो रही भारी देरी से मजदूरों के सामने संकट है। धर्मशाला के पर्यटन स्थलों पर अवैध पार्किंग और वसूली के नाम पर लूट मची है। तहसील कार्यालयों में ‘सुविधा शुल्क’ मांगे बिना सरकारी फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं। जयसिंहपुर और फतेहपुर ब्लॉक में खाद वितरण की व्यवस्था पूरी तरह फेल है। पालमपुर में निजी बस संचालकों की मनमानी से यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। शहरी विकास विभाग ने चुनाव के बाद नए विकास कार्यों पर अघोषित रोक लगा दी है।


​चंबा और जनजातीय क्षेत्र: उपेक्षा का शिकार
पांगी और भरमौर में सड़क संपर्क बहाल न होने से ग्रामीण बाहरी दुनिया से कटे हुए हैं। चंबा मेडिकल कॉलेज में मशीनों के खराब होने से गरीब मरीज इलाज के बिना लौट रहे हैं। जनजातीय क्षेत्र पांगी में राशन की भारी किल्लत है। सलूणी और डलहौजी ब्लॉक में जल शक्ति विभाग की लापरवाही से पाइपलाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। चंबा मुख्यालय में पार्किंग की कमी के चलते हर दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। भरमौर के दुर्गम रास्तों पर बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। चंबा के ऐतिहासिक चौगान के सौंदर्यीकरण के लिए जारी बजट का कोई अता-पता नहीं है। जनजातीय क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। चुराह ब्लॉक के स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर तैनात नहीं मिल रहे हैं। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल के अभाव में सड़क निर्माण के कार्य रुके हुए हैं। चंबा में बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ने से मुख्य बाजारों में दुर्घटनाएं आम हो गई हैं। खड़ामुख-होली सड़क मार्ग पर मलबे के कारण आवाजाही लगातार बाधित है। आपदा प्रबंधन के नाम पर तैयारियों का पूरी तरह अभाव है। प्रशासनिक अधिकारी जनसमस्याओं के समाधान के बजाय लोगों को टाल रहे हैं। सरकारी उपेक्षा के चलते चंबा के स्थानीय लोगों में गहरा रोष है।


​चुनाव बाद का राजनीतिक घमासान
चुनाव खत्म होने के बाद धर्मशाला और चंबा में भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। भाजपा का दावा है कि प्रशासन सत्ताधारी दल की कठपुतली बन चुका है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर अड़ंगा लगा रहा है। चुने हुए जनप्रतिनिधि फील्ड से गायब हैं, जिससे जनता में असंतोष है। अगले 72 घंटों के भीतर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं गलियारों में तेज हैं, जिसका मुख्य कारण प्रशासनिक दक्षता में सुधार और हालिया भ्रष्टाचार की शिकायतों पर नकेल कसना माना जा रहा है।


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