केंद्र ने मंजूर किए ₹1.20 लाख करोड़, मगर जमीन पर काम ठप; कांग्रेस बताए 12 लैबों में से एक भी क्यों नहीं खुली?
बल्क ड्रग पार्क के ₹225 करोड़ में से सिर्फ 117 करोड़ खर्चे, रेल प्रोजेक्ट्स में राज्य का अंशदान दबाए बैठी सरकार
भाजपा का कड़ा पलटवार: राजनीतिक चश्मा उतारकर श्वेत पत्र जारी करे सुक्खू सरकार, जनता को दे पांच तीखे सवालों के जवाब
शिमला न्यूज़ रूम (पंजाब दस्तक / वरिष्ठ पत्रकार मीनाक्षी):
हिमाचल प्रदेश में केंद्र प्रायोजित विकास योजनाओं को लेकर सियासी घमासान चरम पर पहुंच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा विकास कार्यों की समीक्षा के बाद कांग्रेस मंत्रियों की बयानबाजी पर भाजपा ने सीधा और आक्रामक पलटवार किया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा ने मीडिया को जारी आधिकारिक प्रेस बयान में सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। शर्मा ने प्रदेश सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल के विकास के लिए ₹1.20 लाख करोड़ से अधिक की विशाल धनराशि और परियोजनाएं स्वीकृत कीं, लेकिन राज्य सरकार की प्रशासनिक सुस्ती और वित्तीय बदइंतजामी के कारण यह सारा विकास पहिया पटरी से उतर चुका है।
रणधीर शर्मा ने जमीनी हकीकत उजागर करते हुए कहा कि स्वास्थ्य ढांचे के लिए पीएम-अभिम योजना में स्वीकृत लगभग ₹360 करोड़ के बावजूद 9 क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से महज 1 तैयार हो पाया, स्वीकृत 12 एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं (IPHL) में से एक भी धरातल पर शुरू नहीं हो सकी और 73 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट्स में से सिर्फ 29 का ढांचा खड़ा हो पाया है। उन्होंने तीखा सवाल दागा कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल स्पष्ट करें कि इनमें से कितने अस्पताल असल में मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं? इसी प्रकार ऊना बल्क ड्रग पार्क के लिए केंद्र ने ₹1,000 करोड़ का अनुदान स्वीकृत कर ₹225 करोड़ जारी भी कर दिए, लेकिन उद्योग विभाग मात्र ₹117 करोड़ ही खर्च कर सका, वहीं ₹100 करोड़ के मेडिकल डिवाइस पार्क पर भी फैसला लटका हुआ है। इसके अलावा बद्दी रेल लाइन (लागत ₹1,540 करोड़) में राज्य के हिस्से की लगभग ₹231 करोड़ की देनदारी जारी नहीं की जा रही है और भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेलवे लाइन (लागत ₹13,410 करोड़) में भूमि अधिग्रहण व मुआवजे की प्रक्रियाएं लंबित पड़ी हैं।
शर्मा ने बिंदुवार वित्तीय आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि केंद्र ने राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए ₹55,103 करोड़, पीएमजीएसवाई के लिए ₹13,697 करोड़, किशाऊ बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट के लिए ₹15,624 करोड़, रेणुका जी बांध के लिए ₹7,000 करोड़, लूहरी हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए ₹1,800 करोड़, एम्स बिलासपुर के लिए ₹1,400 करोड़ से अधिक, तीन नए मेडिकल कॉलेजों के लिए ₹547 करोड़, ऊना पीजीआई सैटेलाइट सेंटर के लिए ₹495 करोड़, आईजीएमसी सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के लिए ₹200 करोड़, जायका स्वास्थ्य परियोजना के लिए ₹1,422 करोड़, विशेष पूंजीगत निवेश सहायता (SASCI) के ₹2,381 करोड़, पीडीएनए आपदा पैकेज के ₹2,006 करोड़ और बाह्य सहायता प्राप्त पुनर्वास योजनाओं के लिए ₹2,150 करोड़ का मजबूत वित्तीय प्रावधान किया है। शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह विभिन्न चरणों की लागत व ग्रांट है जिसे एकमुश्त मिली राशि नहीं कहा जा सकता। अंत में उन्होंने सुक्खू सरकार से पांच सीधे सवाल पूछे कि केंद्र से स्वीकृत राशि में से कितनी असलियत में खर्च हुई, स्वास्थ्य प्रोजेक्ट्स पूरे होने की समय-सीमा क्या है, बल्क ड्रग पार्क की धीमी चाल का जिम्मेदार कौन है, रेलवे का अंशदान कब जारी होगा और आपदा फंड से कितने कार्य पूरे हुए। उन्होंने कहा कि सरकार केंद्र पर दोषारोपण छोड़ तुरंत श्वेत पत्र जारी कर हिसाब दे।
(यह संपूर्ण जानकारी भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी एवं विधायक रणधीर शर्मा द्वारा मीडिया को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर पंजाब दस्तक की वरिष्ठ पत्रकार मीनाक्षी द्वारा तैयार की गई है। निष्पक्ष, सटीक और बेबाक खबरों के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें, फेसबुक पेज को फॉलो करें और देखते रहें — पंजाब दस्तक: सच की आवाज)
