ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा, मानसा (पंजाब दस्तक)
मानसा:पंजाब के मानसा में कानून के इकबाल को खुली चुनौती देते हुए नशा माफिया ने एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। नशे के खिलाफ बेबाक आवाज उठाने वाले झोटा को उस वक्त निशाना बनाया गया, जब वे एक मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर बिक रहे अवैध नशे का विरोध करने पहुंचे थे। इस सनसनीखेज वारदात के बाद पूरे इलाके में भारी तनाव फैल गया है और पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
2023 से चला रहे थे नशा विरोधी मुहिम
परमिंदर सिंह झोटा साल 2023 से मानसा और आसपास के इलाकों में नशा विरोधी अभियान की अगुवाई कर रहे थे। वे खुलेआम नशीली दवाएं और ‘चिट्टा’ बेचने वालों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते हुए कई बड़े खुलासे कर चुके थे। वे नौजवानों को लामबंद कर प्रशासन तक नशे के नेटवर्क की सूचना पहुंचा रहे थे।
दुकानदार से बहस, अंदर से आए युवक ने दाग दी गोली
प्रत्यक्षदर्शियों और सामने आए वीडियो फुटेज के अनुसार, झोटा अपने कुछ साथियों के साथ मानसा के एक केमिस्ट स्टोर पर पहुंचे थे। वहां नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर दुकानदार के साथ उनकी तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बहस के दौरान ही दुकान के अंदर से एक युवक पिस्तौल लेकर बाहर निकला। आरोपी ने सीधे परमिंदर सिंह पर हथियार तानकर गोली चला दी। गोली आर-पार हो गई और झोटा लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रशासन की भूमिका पर उठे तीखे सवाल
इस खौफनाक हत्याकांड के बाद स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। जनता सीधे तौर पर प्रशासन से जवाब मांग रही है कि जिस जगह पर खुलेआम प्रतिबंधित नशीली दवाओं का धंधा चल रहा था, उसकी जानकारी एक सामाजिक कार्यकर्ता को थी, लेकिन इलाके में गश्त करने वाली पुलिस और ड्रग विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? लोगों का आरोप है कि पंजाब के गांवों और कस्बों में नशा धड़ल्ले से बिक रहा है और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। आम जनता सवाल पूछ रही है कि जब तक नशा विरोधी मुहिम छेड़ने वाले नौजवानों की जान जाती रहेगी, तब तक सरकारें आंखें मूंदे क्यों बैठी रहेंगी?
घटना के बाद भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है।
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