पंजाब दस्तक
विशेष रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक
शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में साढ़े तीन घंटे तक चले तीखे सियासी संग्राम, गंभीर आरोपों की बौछार और अभूतपूर्व तकरार के बाद आखिरकार बहुचर्चित ‘हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक’ ध्वनिमत से पारित हो गया। सदन में पीठ द्वारा मत विभाजन की प्रक्रिया शुरू करते ही सत्ता पक्ष की ‘हां’ की गूंज के साथ इस कानून पर आधिकारिक मुहर लग गई। विपक्ष के कड़े विरोध, वॉकआउट जैसी तल्खी और संशोधन वापस लेने की मांगों को दरकिनार करते हुए सरकार ने उच्च शिक्षण संस्थानों की भर्ती और वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह बदलने वाला ऐतिहासिक कानून पारित कर दिया।
विपक्ष का तीखा प्रहार: स्वायत्तता के हनन और अदालती झटकों की दी दुहाई
विपक्ष के वरिष्ठ सदस्यों ने सरकार की मंशा पर सीधा हमला बोलते हुए इस संशोधन को शिक्षण संस्थाओं के संवैधानिक अधिकारों पर कुठाराघात करार दिया:
रणधीर शर्मा: संशोधन प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षकों की भर्ती कराना यूजीसी (UGC) के स्पष्ट नियमों और नई शिक्षा नीति (NEP) की मूल अवधारणा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि तय बोर्ड में चांसलर, यूजीसी और सरकार के प्रतिनिधियों की मौजूदगी वाली चयन समिति की स्वायत्तता को कुचलकर सरकार शिक्षण संस्थानों में तानाशाही पूर्ण नियंत्रण थोप रही है। उन्होंने चेताया कि बहुमत के नशे में पास कराए जा रहे इस कानून के खिलाफ सड़कों से लेकर अदालत तक जंग लड़ी जाएगी।
विपिन सिंह परमार: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व वरिष्ठ भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय और नौणी बागवानी विश्वविद्यालय का कच्चा-चिट्ठा सदन में रखा। उन्होंने कहा कि सरकार की जिद के कारण देश के शीर्ष शोध संस्थान पिछले पौने चार वर्षों से स्थायी कुलपतियों के बिना एडहॉक व्यवस्था पर चल रहे हैं। उन्होंने मौजूदा 80% मेरिट और 20% इंटरव्यू के फार्मूले को निष्पक्ष बताते हुए कहा कि सरकार बहुमत के बल पर इसे पारित तो करवा रही है, लेकिन पूर्व के असंवैधानिक विधेयकों की तरह यह कानून भी उच्च न्यायालय में एक दिन भी नहीं टिकेगा।
त्रिलोक जमवाल: भाजपा विधायक त्रिलोक जमवाल ने प्रशासनिक मर्यादाओं और प्रोटोकॉल पर तीखा सवाल दागा। उन्होंने कहा कि वित्त समिति में वाइस चांसलर को सदस्य और वित्त सचिव को चेयरमैन बनाना राज्यपाल एवं कुलाधिपति के संवैधानिक विशेषाधिकारों पर खुला डाका है। उन्होंने पूछा कि क्या कल को मंत्री सचिवों के नीचे बैठेंगे? उन्होंने सवाल उठाया कि 57 वर्षों से उत्कृष्ट चल रही व्यवस्था को सरकार के जाने के समय अचानक बदलने की क्या हड़बड़ी थी; इसका उद्देश्य कोई सुधार नहीं, बल्कि चहेतों को उपकृत करना और विरोधियों को रोकना है।
जयराम ठाकुर (नेता प्रतिपक्ष): पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वाटर सेस, पंचायत चुनाव और भर्ती नियमों को जिस तरह अदालतों ने रद्द किया है, उससे इस सम्मानित सदन की गरिमा तार-तार हुई है। उन्होंने तिथिवार हिसाब रखते हुए कहा कि 11 दिसंबर को सरकार बनी और 22 दिसंबर को पेपर लीक हुआ, जिसकी सीधी जिम्मेदारी मौजूदा मुख्यमंत्री पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सुधार की आड़ में व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने या चुनाव से बाहर करने के लिए नियमों को मनमाने ढंग से तोड़-मरोड़ रही है।
सत्ता पक्ष का कड़ा पलटवार: मेरिट की बहाली, वित्तीय अनुशासन और विजीलेंस जांच की मांग
सत्ता पक्ष के विधायकों और मंत्रियों ने विपक्ष के एक-एक आरोप का पुरजोर जवाब देते हुए व्यवस्था में शुचिता लाने की वकालत की:
राजेश धरमानी: कांग्रेस विधायक राजेश धरमानी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि स्वायत्तता के नाम पर विश्वविद्यालयों को राजनीतिक अखाड़ा बना दिया गया था, जहां योग्य और मेधावी युवाओं को दरकिनार कर राजनीतिक पर्चियों पर नियुक्तियां होती रहीं। उन्होंने कहा कि केवल विकसित भारत के नारे लगाने से शोध और नवाचार आगे नहीं बढ़ेगा, जब तक शोधार्थियों और योग्य प्रतिभाओं को निष्पक्ष चयन का हक नहीं मिलेगा।
सुरेश कुमार: कांग्रेस विधायक सुरेश कुमार ने वित्तीय कुप्रबंधन की पोल खोलते हुए बताया कि कर्मचारियों के वेतन मद के पैसे को विश्वविद्यालय प्रशासन ने अन्यत्र डायवर्ट कर दिया, जिससे कर्मचारियों को हड़ताल पर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यूजीसी से ग्रांट नाममात्र आ रही है और पूरा वित्तीय बोझ राज्य सरकार के खजाने पर है; ऐसे में वित्त सचिव की निगरानी से करदाताओं के पैसे की बंदरबांट रुकेगी और सख्त वित्तीय अनुशासन लागू होगा।
जगत सिंह नेगी: राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विपक्ष के दोहरे मानदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आईएएस, एचएएस और शीर्ष पुलिस अधिकारियों की भर्ती लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं से होती है, तो किसी की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठता। उन्होंने पूछा कि जब पारदर्शी संस्था के माध्यम से चयन कराया जा रहा है, तो विपक्ष को विश्वविद्यालयों की तथाकथित स्वायत्तता खतरे में क्यों दिख रही है?
सत्ता पक्ष के अन्य सदस्य: चर्चा के दौरान प्रदेश विश्वविद्यालय में पिछले पांच वर्षों के दौरान बंद लिफाफों में परिणाम तय करने, पूर्व वीसी द्वारा इस्तीफे के बाद बैकडेट फाइलों पर हस्ताक्षर करने और इंजीनियरिंग विंग में बिना काम के करोड़ों के वेतन लुटाने के मामलों की उच्चस्तरीय विजीलेंस जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई गई।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का बड़ा ऐलान: ‘सिफारिशी राज का अंत, अब लिखित परीक्षा की मेरिट से ही बनेंगे प्रोफेसर’
सदन में लंबी और गरमा-गरम चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक स्वायत्तता, पाठ्यक्रम तय करने, परीक्षा संचालन और शोध कार्यों में सरकार का रत्ती भर भी कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
धारा 34 का वाचन: मुख्यमंत्री ने विधेयक की धारा 34 को पढ़कर सुनाते हुए साफ किया कि हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली सीधी भर्तियां पूरी तरह यूजीसी के तय मानकों, योग्यताओं और नियमों के अधीन होंगी। इसमें किसी भी वैधानिक नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है।
पारदर्शिता का संकल्प: उन्होंने कहा कि राजनेताओं के चक्कर काटकर और सिफारिशों के दम पर नौकरियां पाने का दौर अब खत्म हो चुका है। अब नेट, सेट और पीएचडी पास मेधावी युवा लिखित परीक्षा देकर अपनी काबिलियत के बल पर चयनित होंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी।
भर्ती माफिया पर कड़ा संदेश: पेपर लीक मामलों पर विपक्ष को आईना दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार ने धांधलियों पर आंखें मूंद रखी थीं, जबकि उनकी सरकार ने भर्ती माफिया पर कड़ा प्रहार कर दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया। उन्होंने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।
भविष्य के बड़े सुधार: मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि आने वाले समय में विधानसभा और उच्च न्यायालय में भी क्लास-3 व क्लास-4 की भर्तियां अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से कराने पर विचार होना चाहिए। साथ ही, निजी विश्वविद्यालयों में बांटी जा रही डिग्रियों पर अंकुश लगाने के लिए उनकी परीक्षाएं भी नोडल यूनिवर्सिटी से कराने का कानून लाने की तैयारी है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चले इस मैराथन मंथन के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने जब विधेयक को पारित करने की प्रक्रिया शुरू की, तो विपक्ष की आपत्तियों के बीच ‘हां’ के प्रचंड उद्घोष के साथ सदन ने इस ऐतिहासिक संशोधन विधेयक को पारित कर दिया।
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