ब्यूरो चीफ, सुरेंद्र राणा
शिमला (विधानसभा परिसर):
हिमाचल प्रदेश विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार की कर्मचारी व पेंशनर नीतियों पर तीखा हमला बोला। चौड़ा मैदान में हजारों की तादाद में 12 जिलों से पहुंचे पेंशनरों और कर्मचारियों के आंदोलन का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले पौने चार साल के कार्यकाल में सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों की एक भी जायज मांग पूरी नहीं की है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि आज प्रदेश के लाखों पेंशनर और सेवारत कर्मचारी इस बात को लेकर गहरे आक्रोश में हैं कि मुख्यमंत्री केवल मंचों से झूठे दावे करते हैं, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि उनके तमाम वित्तीय लाभ फ्रीज कर दिए गए हैं।
15 प्रतिशत डीए बकाया, मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए तरस रहे बुजुर्ग
नेता प्रतिपक्ष ने वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों का महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ते-बढ़ते 15 प्रतिशत ड्यू हो चुका है। मुख्यमंत्री ने एक बार नहीं बल्कि अनेकों बार सार्वजनिक रूप से घोषणाएं कीं कि डीए जारी किया जाएगा, लेकिन आज तक फूटी कौड़ी जारी नहीं की गई।
जयराम ठाकुर ने मानवीय दृष्टिकोण उठाते हुए कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद बुजुर्गों का बीमार होना स्वाभाविक है। उन्हें इलाज के लिए अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन सरकार उनके मेडिकल रिंबर्समेंट तक का पैसा नहीं दे पा रही है। 70 से 80 वर्ष के बुजुर्ग पेंशनर अपने ही इलाज के बिलों के भुगतान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
वेतन और पेंशन के लाले, निगम-बोर्ड बदहाली की कगार पर
जयराम ठाकुर ने सरकारी निगमों की दयनीय स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा:
एचआरटीसी (HRTC): पूर्व कर्मचारियों और पेंशनरों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही है। वे अपने लंबे समय से रुके एरियर के लिए सड़कों पर उतरने को विवश हैं।
एचपीटीडीसी (HPTDC): पर्यटन विकास निगम के कर्मचारियों को तीन-तीन, चार-चार और पांच-पांच महीने से वेतन तक नसीब नहीं हुआ है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज स्थिति यह बन चुकी है कि कर्मचारी केवल इसी चिंता में रहते हैं कि महीने की एक तारीख को जैसे-तैसे पगार मिल जाए, वही उनके लिए बड़ी बात है। जब कर्मचारियों को समय पर सैलरी और बुजुर्गों को पेंशन नहीं मिल पा रही, तो मुख्यमंत्री किस मुंह से खुद को कर्मचारी हितैषी बताते हैं?
16 सूत्रीय मांग पत्र पर तुरंत विचार करे सरकार
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों और पेंशनरों ने जो 16 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है, उस पर सरकार को फौरन और गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसमें लंबित 15 फीसदी डीए का तुरंत भुगतान, रुके हुए मेडिकल रिंबर्समेंट की एकमुश्त अदायगी, एचआरटीसी पेंशनरों का बकाया एरियर और 1 जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान के समस्त वित्तीय लाभ शामिल हैं।
जयराम ठाकुर ने सरकार को घेरते हुए सीधा सवाल दागा, “अगर मुख्यमंत्री वाकई कर्मचारी हितैषी होने का दावा करते हैं, तो आज प्रदेश के हर चौक और चौराहे पर कर्मचारी धरने पर क्यों बैठे हैं? हर जिले का बुजुर्ग पेंशनर लाठियों के सहारे शिमला आकर प्रदर्शन करने पर क्यों मजबूर है? सीधी सी बात है कि अब व्यवस्था संभालना सरकार के बस की बात नहीं रही। सरकार केवल जैसे-तैसे दिन काटने में लगी है।”
उन्होंने कहा कि पौने चार साल के कार्यकाल में न तो जनहित की कोई नई योजना जमीन पर उतर पाई और न ही पूर्व भाजपा सरकार के समय शुरू की गई विकास की गति को यह सरकार बरकरार रख पाई है। प्रदेश को वित्तीय और प्रशासनिक अराजकता के भंवर में धकेल दिया गया है।
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