पंजाब दस्तक
(वरिष्ठ पत्रकार – भेषज, धर्मशाला/चंबा):
हिमाचल प्रदेश के चंबा प्रवास के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री ने विभागों में वर्षों से सेवाएं दे रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की ज्वलंत समस्याओं और लंबित नीति को लेकर ‘पंजाब दस्तक’ के साथ बेहद तीखी और सीधी बातचीत की। पिछले 10 से 15 सालों से विभागों में दिन-रात पसीना बहाने के बावजूद अनिश्चितता और शोषण का दंश झेल रहे कर्मचारियों के भविष्य पर मुख्यमंत्री ने सरकार की मंशा पूरी तरह साफ कर दी है।
वरिष्ठ पत्रकार भेषज:
“मुख्यमंत्री जी, प्रदेश के सरकारी विभागों में हजारों आउटसोर्स कर्मचारी 10 से 15 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज भी अपने भविष्य और अधिकार को लेकर तरस रहे हैं। हर बार सिर्फ वादे होते हैं और आउटसोर्स व्यवस्था में कर्मचारियों का शोषण जारी रहता है। क्या आपकी ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की सरकार इन कर्मचारियों को इस शोषण से स्थाई मुक्ति दिलाकर कोई ठोस और मजबूत आउटसोर्स पॉलिसी देगी, या यह इंतजार यूं ही चलता रहेगा?”
मुख्यमंत्री का जवाब:
“हमारी सरकार केवल भाषणों वाली नहीं, बल्कि धरातल पर ‘व्यवस्था परिवर्तन’ करने वाली सरकार है। जो कर्मचारी पिछले 10-10, 15-15 वर्षों से आउटसोर्स पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनके संघर्ष और दर्द से हमारी सरकार भली-भांति वाकिफ है और उनके प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।
इस मुद्दे को हमने ठंडे बस्ते में नहीं डाला है, बल्कि इस पर हमारी उच्च स्तरीय बैठक हो चुकी है। संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए कर्मचारियों को कैसे राहत दी जा सकती है, इसके लिए मैंने खुद व्यक्तिगत रूप से लीगल ओपिनियन (कानूनी सलाह) लिया है। मैं स्वयं व्यक्तिगत तौर पर आउटसोर्स पॉलिसी की फाइलों और नियमों का अध्ययन कर रहा हूँ। जिस प्रकार हमारी सरकार ने वर्षों से लटके करुणामूलक मामलों का ऐतिहासिक समाधान निकाला है, ठीक उसी तरह सभी नियमों, कानूनों और संवैधानिक पहलुओं को परखने के बाद हम आउटसोर्स कर्मचारियों के हक में ठोस निर्णय लेकर आगे बढ़ेंगे।”
खबर के प्रमुख मुख्य बिंदु:
खुद समीक्षा कर रहे मुख्यमंत्री: नीति में कोई कानूनी पेंच न फंसे, इसके लिए मुख्यमंत्री स्वयं फाइलों और नियमों का अध्ययन कर रहे हैं।
लीगल ओपिनियन तैयार: नीति को संवैधानिक रूप से अटूट बनाने के लिए विधिक विशेषज्ञों से राय ली जा चुकी है।
शोषण पर लगेगा पूर्णविराम: 10 से 15 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को सुरक्षा देने और शोषण रोकने के लिए नियम तय किए जा रहे हैं।
करुणामूलक के बाद अब आउटसोर्स की बारी: करुणामूलक मामलों के सफल समाधान के बाद अब आउटसोर्स कर्मचारियों का मसला सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में है।
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