ब्यूरो रिपोर्ट: वरिष्ठ पत्रकार भेषज, धर्मशाला
(पालमपुर से ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के साथ विशेष एवं महत्वपूर्ण भेंट)
पालमपुर: सियासत की फाइलों में पिछले 100 वर्षों से अटका राष्ट्रीय महत्व का किशाऊ बांध अब हकीकत की जमीन पर उतरने जा रहा है। पालमपुर में ‘पंजाब दस्तक’ के साथ बेहद गंभीर व महत्वपूर्ण बातचीत में हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आदरणीय शांता कुमार ने इस ऐतिहासिक समझौते पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जो काम एक सदी में नहीं हो सका, वह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और गृह मंत्री श्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व के चलते मुमकिन हुआ है।
शांता कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने साबित कर दिया है कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ धरातल पर काम करने की नीति है। दलगत राजनीति—चाहे कांग्रेस हो या भाजपा—से ऊपर उठकर केंद्र ने छह राज्यों के सम्मानीय मुख्यमंत्रियों को एक मेज पर बिठाया और दशकों पुराने अंतरराज्यीय विवाद को आपसी सहमति से सुलझा दिया।
किशाऊ बांध के बड़े आर्थिक व विकासवादी मायने:
₹15,000 करोड़ का महाप्रोजेक्ट, 90% केंद्र के जिम्मे: इस विशालकाय जलविद्युत परियोजना पर कुल 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका 90 फीसदी हिस्सा सीधे केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 10 फीसदी हिस्सा बाकी लाभार्थी राज्यों में बंटेगा।
हिमाचल की जेब पर शून्य वित्तीय भार: हिमाचल की जमीन जाने के एवज में राज्य के हिस्से के ₹2,000 करोड़ दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की सरकारें वहन करेंगी। यानी हिमाचल प्रदेश को अपनी तरफ से एक भी पैसा नहीं लगाना पड़ेगा।
सालाना ₹1200 करोड़ का बंपर मुनाफा: परियोजना पूरी होते ही हिमाचल प्रदेश को अपनी हिस्सेदारी की बिजली से हर साल सीधे ₹1200 करोड़ का भारी राजस्व मिलेगा, जो प्रदेश की आर्थिकी को नई मजबूती देगा।
422 मेगावाट का पावर बूस्टर: इस बांध से देश को 422 मेगावाट स्वच्छ बिजली मिलेगी, जिससे उत्तर भारत के छह प्रमुख राज्यों की ऊर्जा जरूरतें पूरी होंगी।
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने इस अभूतपूर्व फैसले और ऐतिहासिक सफलता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री श्री अमित शाह और सभी छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों का दिल से आभार व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक बधाई दी।
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