शिमला/धर्मशाला (पंजाब दस्तक ब्यूरो चीफ – सुरेंद्र राणा):
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में सरकारी नियुक्तियों और पदोन्नतियों को लेकर एक बेहद कड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेशों में दोटूक साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार या उससे जुड़े किसी भी उपक्रम में अब कोई भी नियुक्ति, भर्ती या पदोन्नति आरएंडपी (Recruitment and Promotion – R&P) नियमों के विपरीत नहीं होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि विभागों के लिए जो नियम तय किए गए हैं, हर हाल में उन्हीं के अनुसार ही भर्ती प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
R&P नियमों की अनदेखी पर कोर्ट सख्त, ‘बैकडोर’ पर रोक
सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात आई कि विभिन्न सरकारी विभागों, विशेषकर स्वास्थ्य विभाग में तय भर्ती एवं पदोन्नति नियमों (R&P Rules) को दरकिनार कर पहले बड़े पैमाने पर आउटसोर्स के आधार पर लोगों को रख लिया जाता है। इसके बाद उन्हें रोगी कल्याण समिति (RKS) जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से विभाग में ही समाहित (Adjust) कर लिया जाता है।
उच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था पर सख्त ऐतराज जताते हुए इसे नियमों का उल्लंघन माना है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह अधिकारियों द्वारा नियमों से बचकर अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने और विशिष्ट उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक ‘गुप्त मार्ग’ (बैकडोर एंट्री) तैयार करने जैसा है, जिसे अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बजट का बहाना बनाकर युवाओं का शोषण नहीं: हाई कोर्ट
अदालत ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि राज्य सरकार या उसके उपक्रम बजट की बचत का बहाना बनाकर प्रदेश के योग्य युवाओं का शोषण नहीं कर सकते। नियुक्तियां केवल और केवल विज्ञापित और स्वीकृत नियमों के दायरे में ही पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।
गौरतलब है कि आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के करीब 42 प्रमुख संस्थानों और विभागों में वर्तमान में 17,114 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें चिकित्सा शिक्षा विभाग, जल शक्ति, विद्युत निगम और पुलिस महानिदेशक कार्यालय जैसे बड़े महकमे शामिल हैं। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद बिना स्वीकृत R&P नियमों के होने वाली हर प्रकार की मनमानी भर्ती पर पूरी तरह से रोक लग गई है।
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