हिमाचल में DSP के कथित जातीय उत्पीड़न मामले पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा DGP को नोटिस जारी किए जाने से जुड़ी सांकेतिक तस्वीर।

​हिमाचल में थानों से लेकर सचिवालय तक जातिवाद पर बवाल: डीएसपी के उत्पीड़न पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का डीजीपी को कड़ा नोटिस

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पंजाब दस्तक
​कुल्लू में जनजातीय समाज के खिलाफ नफरत फैलाने वालों पर भड़का ‘शोषण मुक्ति मंच’, कहा—संविधान से ऊपर समझने वाले मनुवादियों को बख्शेंगे नहीं


​ब्यूरो रिपोर्ट: सुरेंद्र राणा
​शिमला/कुल्लू
हिमाचल प्रदेश में दलित और जनजातीय समुदाय के खिलाफ लगातार सामने आ रही उत्पीड़न, भेदभाव और नफरत की घटनाओं पर ‘शोषण मुक्ति मंच’ ने तीखा आक्रोश जताते हुए सीधे व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंच के नेताओं ने इसे देश के संविधान, सामाजिक न्याय and भाईचारे पर सीधा हमला करार दिया है। इसी बीच, सूबे की राजधानी शिमला से लेकर दिल्ली के गलियारों तक उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पुलिस महकमे के ही एक वरिष्ठ दलित अधिकारी के जातिगत उत्पीड़न का मामला भारत सरकार के सर्वोच्च संवैधानिक गलियारे तक पहुंच गया।


​अनुच्छेद 338 के तहत स्थापित राष्ट्रीय आयोग का डीजीपी हिमाचल को सख्त समन
​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला प्रशासनिक मोड़ तब आया, जब भारत सरकार के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Castes)—जो कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत स्थापित एक सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है—ने सीधे हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया।


​आयोग के वरिष्ठ अन्वेषक (Senior Investigator) प्रवीण चंद्रा द्वारा जारी इस बेहद कड़े नोटिस में शिमला मुख्यालय में तैनात उप पुलिस अधीक्षक (DSP) श्री विजय कुमार की उस आधिकारिक शिकायत का कड़ा संज्ञान लिया गया है, जो उनके खिलाफ महकमे में ही जानबूझकर किए गए जातिगत उत्पीड़न और गंभीर अत्याचारों (Deliberate Caste-Based Atrocities) के संबंध में है। आयोग ने इस कड़े नोटिस की एक प्रति पीड़ित अधिकारी डीएसपी विजय कुमार को भी जारी कर दी है, जिससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है।


​डीएसपी विजय कुमार का उत्पीड़न और कुल्लू की घटना मनुवादी सोच का घिनौना चेहरा
​शोषण मुक्ति मंच हिमाचल प्रदेश के राज्य संयोजक आशीष कुमार, सह-संयोजक राजेश कोश एवं मिंटा जिट्टा, तथा राज्य कमेटी सदस्य जगतराम और विवेक कश्यप ने एक संयुक्त कड़क बयान जारी कर प्रदेश में दलित और जनजाति समुदाय के खिलाफ लगातार सामने आ रही घटनाओं पर गहरा रोष व्यक्त किया है।


​आशीष कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक ओर डीएसपी विजय कुमार जैसे वरिष्ठ दलित अधिकारी को कथित रूप से जातिगत उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंचता है, वहीं दूसरी ओर कुल्लू में जनजातीय समुदाय के खिलाफ सोशल मीडिया पर खुलेआम घृणा फैलाने वाली टिप्पणियां की जा रही हैं। यह साफ साबित करता है कि प्रदेश में भी मनुवादी और सांप्रदायिक मानसिकता के लोग खुद को देश के कानून और संविधान से ऊपर समझने लगे हैं।


​कड़े कानूनी प्रावधान: आईटी एक्ट की धाराओं के तहत भी हो कार्रवाई
​मंच के कानूनी विशेषज्ञों और नेताओं ने मांग उठाई है कि सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर न केवल एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की प्रासंगिक धाराओं के तहत भी तुरंत मुकदमा दर्ज होना चाहिए। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी पूरे समुदाय के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार करना और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना एक गैर-जमानती अपराध है, जिस पर कानून को बिना किसी दबाव के तुरंत एक्शन लेना चाहिए।


​अकूत अस्पताल की घटना की आड़ में नफरत का धंधा बर्दाश्त नहीं
​मंच के नेताओं ने कुल्लू मामले पर बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि कुल्लू अस्पताल में हुई महिला की मृत्यु की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच निश्चित रूप से होनी चाहिए। यदि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। लेकिन, इस दुखद घटना की आड़ लेकर पूरे जनजातीय समाज को सामूहिक रूप से गालियां देना, आरक्षण के खिलाफ जहर उगलना और समाज में नफरत फैलाना संघी-मनुवादी सोच का सबसे घिनौना चेहरा है। ऐसी विभाजनकारी ताकतें मेहनतकश जनता को जाति और जनजाति के नाम पर आपस में बांटकर अपने राजनीतिक हित साधना चाहती हैं।


​असली मुद्दों (बेरोजगारी, महंगाई, निजीकरण) से ध्यान भटकाने की बड़ी साजिश
​मंच के इन नेताओं ने तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि आज देश भर में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और मेहनतकश वर्ग के संवैधानिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। जानबूझकर आरक्षण को बदनाम किया जा रहा है और सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर करने की साजिशें रची जा रही हैं। नफरत की इस राजनीति के जरिए जनता के असली and बुनियादी मुद्दों—जैसे जानलेवा बेरोजगारी, बेकाबू महंगाई, अंधाधुंध निजीकरण और श्रमिक अधिकारों के हनन—से ध्यान भटकाया जा रहा है। शोषण मुक्ति मंच इस खतरनाक और जनविरोधी राजनीति को हिमाचल की धरती पर कभी सफल नहीं होने देगा।


​कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, सीधे SC/ST एक्ट में हो जेल
​मंच ने डीएसपी विजय कुमार के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा महानिदेशक (DGP) को तलब किए जाने और जनजातीय समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज होने का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया है कि केवल औपचारिक कागजी खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। दोषियों के खिलाफ तुरंत एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित कानून की सभी प्रासंगिक और गैर-जमानती धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित कर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। किसी भी दोषी को चाहे वह कितना भी बड़ा रसूखदार क्यों न हो, कोई राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।


​जनता से आर-पार के संघर्ष का आह्वान
​मंच के नेताओं ने प्रदेश की जनता, मजदूरों, किसानों, युवाओं, छात्रों, दलितों, आदिवासियों और सभी लोकतंत्र समर्थक शक्तियों से पुरजोर आह्वान किया है कि वे जाति और जनजाति के नाम पर समाज के टुकड़े करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर सड़कों पर उतरें। उन्होंने कहा कि संविधान, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे की रक्षा का संघर्ष आज देश और समाज के अस्तित्व को बचाने का संघर्ष बन चुका है और इसे आखिरी दम तक लड़ा जाएगा।
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