सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
स्थान: शिमला
हिमाचल प्रदेश (पंजाब दस्तक): राज्य के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और लंबे समय से पेंडिंग पड़े एरियर का मामला अब कानूनी मोर्चे पर बेहद निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। अपने वित्तीय हकों की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों के पक्ष में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने सुक्खू सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि वे कर्मचारियों के लंबित अभ्यावेदनों (Representations) पर 6 हफ्ते के भीतर नियमानुसार अंतिम फैसला लें।
6 सप्ताह में फैसला और भुगतान की डेडलाइन
न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने यह आदेश सुनीता देवी, पूजा रानी, हिमांशु शर्मा, संजीव कुमार और कांता देवी सहित अन्य कर्मचारियों की ओर से दायर अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने अपने निर्देशों में स्पष्ट किया है कि:
सरकार कर्मचारियों के लंबित प्रतिवेदन और दावों पर 6 सप्ताह की तय सीमा के भीतर गहराई से विचार कर अंतिम निर्णय ले।
यदि कानूनी पड़ताल और जांच के बाद कर्मचारी DA की 5 लंबित किस्तों और एरियर के हकदार पाए जाते हैं, तो उन्हें इस राशि का भुगतान भी इसी 6 हफ्ते की समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित करना होगा।
2022 से अटका है हक, भेदभाव के भी उठे सवाल
कर्मचारियों की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए दलील दी गई कि राज्य सरकार के विभिन्न कार्यालय ज्ञापनों (Office Memorandums) के तहत उन्हें 1 जुलाई 2022 से महंगाई भत्ते का एरियर मिलना तय था। इसके बावजूद बजट और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला देकर इस राशि को अब तक जारी नहीं किया गया।
इसके अलावा याचिकाओं में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया कि राज्य सरकार ने एक विशिष्ट वर्ग के कर्मचारियों को तो केंद्रीय दरों के आधार पर महंगाई भत्ते का लाभ दे दिया, जबकि आम कर्मचारियों को इस अधिकार से वंचित रखा गया। कर्मचारियों ने इसी असमानता और भेदभाव को अपनी याचिका का आधार बनाया था।
अदालत ने नहीं दिया गुण-दोष पर फैसला, गेंद सरकार के पाले में
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि इस स्तर पर याचिकाओं में उठाए गए मुख्य विवादों या दावों के गुण-दोष (Merits) पर कोई विस्तृत फैसला नहीं सुनाया जा रहा है। अदालत ने याचिकाओं को निपटाते हुए पूरा मामला सक्षम अधिकारियों को सौंप दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि कर्मचारियों को डीए और एरियर का भुगतान स्वतः मंजूर नहीं हुआ है, बल्कि सुक्खू सरकार को पहले हर दावे की वैधानिकता जांचनी होगी और यह तय करना होगा कि कर्मचारी इसके पात्र हैं या नहीं।
सुक्खू सरकार की अग्निपरीक्षा, कर्मचारियों की टिकी नजरें
हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य सरकार के सामने तय समय-सीमा के भीतर निर्णय लेने का भारी दबाव बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि 5 लंबित DA किस्तों और करोड़ों रुपये के एरियर को लेकर सरकार क्या प्रशासनिक रुख अपनाती है। हिमाचल प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
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