अनुराग ठाकुर ने हिमाचल में दोबारा लॉटरी शुरू करने पर सुक्खू सरकार को घेरा

धूमल और वीरभद्र सिंह ने जिस लॉटरी को बंद कराया, सुक्खू सरकार उसे दोबारा क्यों लाई? पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा के तीखे सवाल

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​पंजाब दस्तक
हमीरपुर / शिमला (विशेष प्रस्तुति: वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा)


​हिमाचल प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा वर्षों बाद दोबारा लॉटरी प्रणाली शुरू करने की कवायद पर सियासी घमासान छिड़ चुका है। इसी गंभीर विषय पर पंजाब दस्तक की वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर से सीधी और बेबाक बातचीत की।


​उमांशी राणा: अनुराग जी, प्रदेश सरकार राजस्व जुटाने के नाम पर लॉटरी व्यवस्था दोबारा शुरू करने जा रही है। आप इसका इतना कड़ा विरोध क्यों कर रहे हैं?


​अनुराग सिंह ठाकुर: उमांशी जी, यह राजस्व बढ़ाने का उपाय नहीं बल्कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की मेहनत की गाढ़ी कमाई लूटने का जरिया है। लॉटरी और जुए के चक्कर में आम आदमी के घर का चूल्हा-चौका और खान-पान का बजट बिगड़ जाता है। जब लोग फटाफट अमीर बनने के चक्कर में गाढ़ी कमाई गंवाएंगे, तो परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।


​उमांशी राणा: लेकिन सरकार का तर्क है कि इससे खजाने को करोड़ों का राजस्व मिलेगा। इस पर आपका क्या रुख है?
​अनुराग सिंह ठाकुर: खजाने की भरपाई जनता की जेब काटकर नहीं की जा सकती। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल जी और कांग्रेस के ही वरिष्ठ पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह जी ने लॉटरी के सामाजिक दुष्प्रभावों और बर्बादी को देखते हुए इसका कड़ा विरोध किया था और इसे बंद कराया था। जब दोनों दिग्गज मुख्यमंत्रियों ने जनहित में इसे बंद कर दिया था, तो आज वर्षों बाद इसे दोबारा शुरू करने की क्या मजबूरी है? यह देवभूमि के परिवारों को बर्बादी की ओर धकेलने वाला कदम है।


​उमांशी राणा: यदि सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती, तो आपका अगला कदम क्या होगा?
​अनुराग सिंह ठाकुर: हम इस जनविरोधी फैसले को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। जनता, युवाओं और परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए इस लड़ाई को सड़क से लेकर हर स्तर तक पूरी ताकत से लड़ा जाएगा।


​आपकी राय क्या है? — कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें
​हिमाचल प्रदेश में लॉटरी दोबारा शुरू किए जाने के फैसले पर आपकी क्या राय है? क्या सरकार का यह कदम सही है या इससे आम परिवारों का आर्थिक संकट बढ़ेगा?


​नीचे कमेंट सेक्शन में अपनी बेबाक राय जरूर दर्ज करें ताकि जनता की आवाज सीधे शासन-प्रशासन और सरकार तक पहुंचे।
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