सुरेंद्र राणा, ब्यूरो चीफ
पंजाब दस्तक न्यूज़ रूम, चंडीगढ़
आर्थिक तंगहाली और खाली खजाने की मार झेल रहे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर सबसे बड़ी तारणहार बनकर सामने आई है। कठिन आर्थिक चुनौतियों के भंवर में फंसी प्रदेश सरकार के लिए दिल्ली दरबार से राहत का बड़ा पैगाम आया है। राज्य सरकार की विशेष वित्तीय दरखास्त और वित्त विभाग के पत्राचार पर त्वरित संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम इमदाद को सैद्धांतिक हरी झंडी दे दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश की डांवाडोल वित्तीय स्थिति को तत्काल ऑक्सीजन मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
उच्चस्तरीय मंथन के बाद मुहर, 100-100 करोड़ का सटीक फॉर्मूला
विश्वस्त सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में प्रशासनिक स्तर पर हुई कवायद के बाद केंद्र से मंजूर 200 करोड़ की यह रकम दो अत्यंत संवेदनशील मोर्चों पर 50-50 फीसदी के अनुपात में झोंकी जाएगी। इसमें से 100 करोड़ रुपये सीधे तौर पर अन्नदाताओं की जरूरत यानी फर्टिलाइजर (खाद) की व्यवस्था के लिए रखे गए हैं, जबकि बाकी 100 करोड़ रुपये का इस्तेमाल सरकारी खरीद और प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया को गति देने के लिए किया जाएगा।
रबी के रण में किसानों को ढाल: खाद संकट से पहले ही पुख्ता घेराबंदी
हिमाचल में नवंबर और दिसंबर का महीना कृषि के लिहाज से रीढ़ माना जाता है। गेहूं, जौ, चना, सरसों, राई और अलसी की बिजाई के साथ-साथ मटर व हरी सब्जियों के सीजन में किसानों को खाद की सबसे ज्यादा दरकार होती है। ऐन वक्त पर खाद की किल्लत पैदा न हो और किसानों पर कोई अतिरिक्त मार न पड़े, इसके लिए 100 करोड़ रुपये सीधे रासायनिक खाद की अग्रिम खरीद और आपूर्ति तंत्र को चाक-चौबंद करने में लगाए जाएंगे।
ठप पड़ी सरकारी खरीद को मिलेगी नई रफ्तार
वहीं दूसरी ओर, 100 करोड़ का प्रोक्योरमेंट फंड विभागों में अटकी फाइलों और रुकी हुई सरकारी खरीद को फिर से पटरी पर लाएगा। सरकारी योजनाओं के तहत आवश्यक उपकरणों, सामग्रियों और सेवाओं की खरीद के लिए इस बजट से तुरंत भुगतान हो सकेगा, जिससे बाजार और प्रशासनिक महकमे दोनों में आर्थिक प्रवाह तेज होगा।
अब फंड ट्रांसफर की उल्टी गिनती शुरू
सैद्धांतिक मुहर लगते ही अब सारा दारोमदार दिल्ली से शिमला की ट्रेजरी में पैसा क्रेडिट होने पर टिका है। जैसे ही यह किस्त जारी होगी, कृषि और संबंधित विभाग जमीन पर इसका असर दिखाना शुरू कर देंगे। इस त्वरित फैसले ने यह साबित कर दिया है कि हिमाचल की आर्थिक डगर भले ही पथरीली हो, लेकिन जब भी पहाड़ पर संकट गहराया है, केंद्र ने बिना देरी किए मदद का हाथ आगे बढ़ाया है।
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