पंजाब दस्तक
वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा
हमीरपुर। मुख्यमंत्री के गृह जिले हमीरपुर में मानसून के आगमन से पहले ही प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खुल गई है। मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की चेतावनी के बावजूद जिला प्रशासन कुंभकरणीय नींद में सोया हुआ है। जिले के तमाम ब्लॉकों में प्रशासनिक सुस्ती, विभाग की लापरवाही और राजनीतिक खींचतान ने आम जनजीवन को संकट में डाल दिया है। आज की स्थिति यह है कि शहर की सड़कों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं तक, हर तरफ बदहाली का मंजर है।
1. भोरंज ब्लॉक: पेयजल और जर्जर सड़कों से त्रस्त है ग्रामीण जनता
भोरंज क्षेत्र में ‘जल जीवन मिशन’ के दावों की हवा निकल चुकी है। पाइपलाइनें बिछाने के नाम पर सड़कों को खोदकर छोड़ दिया गया है, जो अब मानसून में बड़े हादसों को न्योता दे रही हैं। ग्रामीण मीलों दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि जल शक्ति विभाग के अधिकारी केवल झूठे आंकड़े पेश कर रहे हैं। भोरंज की जनता का सब्र अब जवाब दे रहा है और आक्रोश सड़कों पर दिखने लगा है।
2. सुजानपुर ब्लॉक: लोक निर्माण विभाग की लापरवाही से खतरनाक होती सड़कें
सुजानपुर के प्रमुख संपर्क मार्गों की स्थिति दयनीय है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि रात के समय वाहन चालकों के लिए यह जानलेवा साबित हो रहे हैं। पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग बजट का बहाना बनाकर अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ रहा है। स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासन केवल तब जागता है जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है, लेकिन उससे पहले सुधार करने की कोई सुध नहीं ली जाती।
3. नादौन ब्लॉक: अवैध खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक हुआ प्रशासन
नादौन में अवैध खनन का काला कारोबार बेखौफ चल रहा है। नदियों के किनारों को खोखला किया जा रहा है, जिससे बरसात के दिनों में बाढ़ और भू-स्खलन का खतरा कई गुना बढ़ गया है। प्रशासन की मौन सहमति कहीं न कहीं माफियाओं के साथ मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। पर्यावरण को हो रहे इस नुकसान पर स्थानीय लोग डरे हुए हैं और प्रशासन के सख्त रवैये की मांग कर रहे हैं।
4. बड़सर ब्लॉक: स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी बनी जानलेवा समस्या
बड़सर के अस्पतालों में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जीवन रक्षक दवाएं। मरीजों को मामूली इलाज के लिए भी बड़े अस्पतालों की ओर रेफर कर दिया जाता है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग का प्रबंधन कागजों पर चमक रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में अस्पताल केवल रेफर सेंटर बनकर रह गए हैं। जनता के स्वास्थ्य के साथ यह खिलवाड़ अब बर्दाश्त से बाहर है।
5. जिला परिषद और राजनीतिक दांव-पेच के बीच पिसती आम जनता
जिला परिषद की बैठकें केवल राजनीतिक मंच बन गई हैं। भाजपा और कांग्रेस के प्रतिनिधि विकास पर चर्चा करने के बजाय एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में व्यस्त हैं। श्रेय लेने की इस अंधी दौड़ में आम आदमी की मूलभूत समस्याएं ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। क्या प्रशासन इन राजनीतिक दलों की कठपुतली बन चुका है जो जनता की आवाज को दबाने में लगा है?
6. आम जनता का प्रचंड आक्रोश: विकास कार्यों में चाहिए ठोस कार्रवाई
हमीरपुर की जनता अब केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने वाली नहीं है। लोग सड़कों पर उतरने की तैयारी कर चुके हैं। मांग साफ है—मानसून से पहले नालों की सफाई, टूटी सड़कों की मरम्मत और अस्पतालों में डॉक्टरों की तैनाती सुनिश्चित की जाए। कामचलाऊ रवैया अब नहीं चलेगा, जनता को अब धरातल पर परिणाम चाहिए।
7. प्रशासनिक नाकामियां और भविष्य की भयावह तस्वीर
नगर परिषद और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है। शहर के मुख्य नालों में कचरे का अंबार लगा है, जो मानसून की पहली बारिश के साथ ही शहर को जलमग्न कर सकता है। प्रशासन की ‘मानसून पूर्व तैयारी’ केवल एक खोखला जुमला साबित हो रही है। यदि अभी भी समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह जनता का प्रचंड गुस्सा प्रशासन के लिए भारी पड़ेगा।
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