पंजाब दस्तक
विशेष रिपोर्ट: उमांशी राणा (वरिष्ठ पत्रकार, हमीरपुर)
हमीरपुर / हिमाचल प्रदेश:
हिमाचल प्रदेश की समस्त ग्राम पंचायतों के निवासियों और आम जनता के लिए पंजाब दस्तक के माध्यम से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जागरूक करने वाली खबर सामने आई है। वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा (हमीरपुर) ने पूरे राज्य की जनता से अपील करते हुए ग्राम सभा (आम सभा) के वास्तविक स्वरूप, आपके अधिकारों और बैठकों के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों पर विशेष प्रकाश डाला है।
अक्सर देखा जाता है कि आम नागरिकों को यह जानकारी ही नहीं होती कि ग्राम सभा वास्तव में क्या है और इसकी ताकत क्या है। इसी अज्ञानता का फायदा उठाकर कई बार बैठकों से पहले या खाली रजिस्टरों पर ग्रामीणों और प्रतिनिधियों से हस्ताक्षर करवा लिए जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा ने हिमाचल के सभी ग्रामवासियों को एकजुट होकर इस विषय पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया है।
ग्राम सभा में जरूर जाएं: जितने अधिक लोग होंगे, उतना ही मजबूत होगा गांव का फैसला
ग्राम सभा केवल एक बैठक नहीं है, बल्कि आपके गांव के भविष्य को तय करने वाली मुख्य चौपाल है। वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को ग्राम सभा में जरूर जाना चाहिए।
उपस्थिति ही तय करती है अंतिम फैसला:
ग्राम सभा में जितनी अधिक ग्रामीणों की उपस्थिति होगी, बैठक उतनी ही प्रभावी होगी। वहां सबके सामने रजिस्टर में जो लिखा जाता है और जो प्रस्ताव पास होता है, वही अंतिम और सर्वमान्य (फाइनल) होता है।
गांव को होते हैं अनेक सीधे फायदे:
बैठक में खुद शामिल होने से गांव के विकास के लिए कई योजनाएं सीधे धरातल पर उतरती हैं, बजट का सही उपयोग होता है और पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ मिलता है। इसलिए अपने गांव के फायदे के लिए ग्राम सभा की हर बैठक जरूर अटेंड करें।
जानिए क्या होती है आम सभा (ग्राम सभा) और कैसे काम करती है?
गांव के प्रत्येक पंजीकृत वयस्क मतदाता (18 वर्ष या उससे अधिक आयु) से मिलकर ग्राम सभा बनती है। यह किसी अधिकारी या नेता की नहीं, बल्कि जनता की अपनी सभा है:
गांव आपका, काम आपका, फैसला भी आपका:
गांव में रास्ते और नालियां कहाँ बनेंगी, मनरेगा के तहत क्या काम होगा, बीपीएल सूची में किसका नाम जुड़ेगा और पंचायत का विकास बजट कहाँ खर्च होगा—इन सभी बातों का फैसला इसी आम सभा में बैठकर लिया जाता है।
बैठक की प्रक्रिया और नियम:
ग्राम सभा में पंचायत प्रधान, सचिव और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों (Concerned Officers) की उपस्थिति अनिवार्य होती है। बैठक तभी वैध मानी जाती है जब न्यूनतम आवश्यक ग्रामीण (कोरम) इसमें भाग लें।
बहकावे में न आएं: उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करते समय रखें इन बातों का ध्यान
आम जनता की अनभिज्ञता के कारण कई जगह केवल कागजी कोरम दिखाकर रजिस्टर भर दिए जाते हैं और गांव के असली विकास कार्य पीछे छूट जाते हैं। किसी के भी बहकावे में आए बिना इन मुख्य बातों पर विशेष ध्यान दें:
याद रखें—हस्ताक्षर है आपकी उपस्थिति का कानूनी प्रमाण:
आपका हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आप ग्राम सभा की कार्यवाही में उपस्थित थे। यदि पहले ही हस्ताक्षर करवा दिए जाएं और बाद में कार्यवाही भरी जाए, तो इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं और यह बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।
कार्यसूची (एजेंडा) सुने बिना उपस्थिति दर्ज न करें:
बैठक के स्थान और समय पर समय से पहुंचे। जब अधिकारी या प्रधान पूरी बैठक की कार्यसूची पढ़कर सुना दें और कार्यवाही शुरू हो जाए, तभी उपस्थिति रजिस्टर पर अपने हस्ताक्षर करें।
अधिकारियों की उपस्थिति और कोरम जरूर जांचें:
देखें कि क्या संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं या नहीं। बिना अधिकारियों और बिना पूरे कोरम के केवल रजिस्टर भर देना कागजी खानापूर्ति है, जिससे गांव का कोई भला नहीं होता।
जागरूक नागरिक बनें, प्रश्न पूछें और अपनी बात रखें
वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा ने हिमाचल प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों और आम जनता को प्रेरित करते हुए कहा:
”इलाका आपका है, गांव आपका है और विकास के काम भी आपके अपने हैं। किसी के भी बहकावे में न आएं। जागरूक नागरिक बनें, प्रश्न पूछें, कार्यसूची जानें, अपनी बात रखें और ग्राम सभा में उपस्थित होकर इसे वास्तव में ‘जनता की सभा’ बनाएं। क्योंकि जागरूक ग्रामवासी ही पारदर्शी पंचायत की पहचान हैं।”
पंजाब दस्तक की अपील:
हिमाचल की सभी पंचायतों और पंचायत दफ्तरों से जुड़े आम नागरिक इस बात पर विशेष ध्यान दें। इस जानकारी को अपने गांव-गली के हर नागरिक तक पहुंचाएं ताकि फर्जी कार्यवाही पर पूरी तरह रोक लगे और आम सभा में जनता की आवाज बुलंद हो सके।
