चार बार के सांसद का दोटूक जवाब: केवल कागजी घोषणाओं से नहीं बनते मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान, भाजपा ने दिया बजट और असली मंजूरी
उमांशी राणा, वरिष्ठ पत्रकार, पंजाब दस्तक (हमीरपुर)
हिमाचल प्रदेश की राजनीति के दो सबसे बड़े चेहरों— सूबे के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और हमीरपुर से चार बार के सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर— के बीच मेडिकल कॉलेज के श्रेय को लेकर छिड़ी सियासी जंग अब अपने चरम पर पहुंच गई है। गांधी चौक पर आयोजित एक विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे दिग्गज भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि हालिया निकाय व पंचायत चुनावों में मिली करारी राजनीतिक शिकस्त से पूरी सरकार बौखला गई है और मुख्यमंत्री अपनी नाकामी छुपाने के लिए अनाप-शनाप बयानबाजी पर उतर आए हैं।
नेताओं के इस हाई-प्रोफाइल दंगल और विकास कार्यों पर हो रही राजनीति को लेकर यह श्लोक बिल्कुल सटीक बैठता है:
न कश्चित् कस्यचिन्मित्रं न कश्चित् कस्यचिद्रिपुः।
व्यवहारेण जायंते मित्राणि रिपवस्तथा॥
परस्परं विरोधं तु तक्त्वा कार्यं समाचरेत्।
(अर्थात: राजनीति में कोई स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता, बल्कि व्यवहार ही सब तय करता है। लोकहित के बड़े कार्यों में आपसी गतिरोध और अहंकार को त्यागकर ही जन कल्याण संभव है।)
घोषणाओं से नहीं, दूरदर्शिता से खड़े होते हैं संस्थान: अनुराग
चार बार के सांसद और पूर्व केंद्रीय खेल व सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री के उन आरोपों की धज्जियां उड़ा दीं, जिसमें उन पर श्रेय लेने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
”मुख्यमंत्री जी को यह समझना चाहिए कि मेडिकल कॉलेज जैसे विशाल और ऐतिहासिक संस्थान केवल खोखली घोषणाएं करने या फीते काटने से धरातल पर नहीं आते। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच प्रशासनिक दूरदर्शिता, बेहतर तालमेल और समयबद्ध कार्यप्रणाली की आवश्यकता होती है। सिर्फ बयानों से इमारतें खड़ी नहीं होतीं।”
भाजपा सरकार की बदौलत मिला हमीरपुर को यह हक
अनुराग ठाकुर ने तथ्यों के साथ दावा किया कि साल 2014 से पहले की सरकारों में हमीरपुर मेडिकल कॉलेज सिर्फ चुनावी चर्चाओं और फाइलों तक सीमित था। लेकिन जैसे ही केंद्र में भाजपा की सरकार बनी, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारा गया:
सैकड़ों करोड़ का केंद्रीय बजट: केंद्र सरकार ने रिकॉर्ड समय में परियोजना को वास्तविक प्रशासनिक मंजूरी दी और अपने हिस्से का शत-प्रतिशत बजट समय पर जारी किया।
राज्य सरकार की ढिलाई ने रोका रास्ता: सांसद ने गंभीर आरोप लगाया कि केंद्र की तत्परता के बावजूद प्रदेश सरकार ने भूमि आवंटन और अन्य जरूरी कागजी औपचारिकताओं में अनावश्यक रोड़े अटकाए। यदि राज्य सरकार ढिलाई न बरतती, तो यह आलीशान भवन काफी पहले बनकर जनता को समर्पित हो चुका होता।
अधूरे इंतजामों और बदहाली पर उठाए सवाल
हाल ही में मेडिकल कॉलेज का औचक निरीक्षण करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ने वर्तमान व्यवस्था पर कड़ा रोष जताया। उन्होंने कहा कि भवन का निर्माण वर्षों पहले पूरा हो जाने के बावजूद अभी तक वहां आधुनिक उपकरण, आवश्यक फर्नीचर और डॉक्टरों के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार न कर पाना राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्रशासनिक विफलता है। उन्होंने दोटूक कहा कि यदि विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार आवाज नहीं उठाता, तो सोई हुई सरकार इस दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाती।
हिमाचल की राजनीति और जमीनी स्तर से जुड़ी ऐसी ही बेबाक व सटीक खबरों के लिए हमारे ‘पंजाब दस्तक’ के फेसबुक पेज को लाइक करें, फॉलो करें और ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।
