विशेष कवरेज: सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ, पंजाब दस्तक)
कांग्रेस आलाकमान का बड़ा फैसला: आई.एन. मेहता संभालेंगे राष्ट्रीय भूमिका, बिलासपुर बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष तेजस्वी शर्मा बने नए प्रमुख
शिमला: हिमाचल प्रदेश में संगठन को धरातल पर अधिक धारदार, प्रभावी और कानूनी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के विधि, मानवाधिकार एवं आरटीआई विभाग का पुनर्गठन किया गया है। शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान विभाग की नई कार्यकारिणी का आधिकारिक ऐलान किया गया।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष विनय कुमार की नियुक्ति के बाद पार्टी के अग्रिम संगठनों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत यह महत्वपूर्ण विस्तार किया गया है।
मुख्य नियुक्तियाँ एवं संगठनात्मक ढांचा
1. आई.एन. मेहता बने एआईसीसी कॉर्डिनेटर (HP State Coordinator)
2012 से लगातार 14 वर्षों तक विभाग के चेयरमैन के रूप में सफल सेवाएं देने वाले वरिष्ठ नेता श्री आई.एन. मेहता जी को पदोन्नत कर AICC कॉर्डिनेटर की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे केंद्र (आलाकमान) और हिमाचल प्रदेश संगठन के बीच समन्वय की मुख्य कड़ी के रूप में कार्य करेंगे।
2. वरिष्ठ अधिवक्ता तेजस्वी शर्मा बने नए प्रदेश अध्यक्ष (Chairperson)
बिलासपुर बार एसोसिएशन व बार काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष और लंबा वकालत का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्री तेजस्वी शर्मा जी को हिमाचल प्रदेश स्टेट लॉ, मानवाधिकार और आरटीआई विभाग का नया चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है।
3. ए.डब्ल्यू.पी.ओ. (AWPO) पद पर संजीव शर्मा नियुक्त
संगठन के कानूनी कामकाज और मानवाधिकार से जुड़े मामलों को गति देने के लिए श्री संजीव शर्मा जी को ए.डब्ल्यू.पी.ओ. (AWPO) के पद पर मनोनीत किया गया है।
मंच पर शीर्ष नेतृत्व व वरिष्ठ अधिवक्ताओं की उपस्थिति
इस प्रेस वार्ता में संगठन के प्रमुख चेहरे एक साथ नजर आए:
श्री सुशांत कपरेट जी (संयोजक व मंच संचालक)
श्री यशवर्धन चौहान जी (सीनियर वाइस प्रेसिडेंट)
श्री प्रणय प्रताप जी (पूर्व वर्किंग चेयरमैन)
एडवोकेट रंजना पटियाल जी (नवनिर्वाचित सदस्य, बार काउंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश)
कैंथला साहब, प्रभार जी, पठानिया जी एवं युवा नेता रोहित जी
नवनियुक्त अध्यक्ष तेजस्वी शर्मा का शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार
पदभार ग्रहण करने के बाद नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शर्मा ने केंद्रीय व राज्य नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल और विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी का धन्यवाद किया।
तेजस्वी शर्मा ने आई.एन. मेहता जी के मार्गदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में लीगल फ्रंट पर ऐतिहासिक कार्य हुए हैं और उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा।
विभाग की प्राथमिकताएँ: अधिवक्ताओं के हित, मानवाधिकार और RTI
RTI – लोकतंत्र का सबसे शक्तिशाली हथियार: पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और यूपीए सरकार के ऐतिहासिक आरटीआई कानून का उल्लेख करते हुए तेजस्वी शर्मा ने कहा कि कांग्रेस ने देश के अंतिम व्यक्ति के हाथ में सत्ता से बेखौफ सवाल पूछने का अधिकार दिया है।
बिना भेदभाव अधिवक्ताओं की सुरक्षा: उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल पद नहीं बल्कि बड़ी जिम्मेदारी है। वह प्रदेश के प्रत्येक अधिवक्ता के अधिकारों की रक्षा के लिए बिना किसी राजनीतिक या दलीय भेदभाव के हमेशा ढाल बनकर खड़े रहेंगे।
मानवाधिकार संरक्षण: राज्य में कहीं भी मानवाधिकारों का हनन होने पर विभाग पीड़ित पक्ष को त्वरित और मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करेगा।
विपक्ष पर कड़ा हमला: सुधीर शर्मा को सीधे आड़े हाथों लिया
भाजपा नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री आवास के घेराव और ‘झूठे मुकदमों’ के आरोपों का करारा जवाब देते हुए तेजस्वी शर्मा ने तीखा हमला बोला:
”जिस दल की गोद में आज आप (सुधीर शर्मा) बैठे हैं, वह आपको कभी गले नहीं लगाने वाली। आपकी कुंठा और छटपटाहट साफ दिखाई दे रही है। आपने उस कांग्रेस पार्टी को त्यागा है जिसने आपके पूरे परिवार को राजनीति के शीर्ष पर पहुँचाया।”
तेजस्वी शर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में मुख्यमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की गई, तो पूरी कांग्रेस पार्टी हर मंच पर इसका मुंहतोड़ जवाब देगी और कानूनी कार्रवाई करेगी।
कानूनी स्थिति पर स्पष्टता: FIR निष्पक्ष जांच की शुरुआत है, दोष सिद्ध होना नहीं
कानूनी पहलुओं को रेखांकित करते हुए तेजस्वी शर्मा ने स्पष्ट किया:
साक्ष्यों पर आधारित FIR: भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत एफआईआर किसी राजनीतिक बयानबाजी पर नहीं, बल्कि साक्ष्यों और प्राथमिक जांच के आधार पर दर्ज होती है। एफआईआर दर्ज होने का मतलब आरोपी होना नहीं, बल्कि जांच की शुरुआत है।
जांच का खुला चैलेंज: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुले तौर पर घोषणा की है कि वे सीबीआई, ईडी, इनकम टैक्स या हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के जजों से किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। क्या सुधीर शर्मा में इतनी हिम्मत और निष्पक्षता है कि वे भी सामने आकर जांच का सामना करें?
विजिलेंस और आरटीआई: विजिलेंस और इंटेलिजेंस जैसी संस्थाओं की संवेदनशीलता और जनहित की गोपनीयता को देखते हुए उन्हें आरटीआई के कुछ प्रावधानों से बाहर रखा गया है, जो कि केंद्रीय कानून (RTI Act 2005) के नियमों के पूर्णतः अनुकूल है।
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