GMADA 100 मीटर लिंक सड़क और N Choe पुल मोहाली

जनता के टैक्स की बर्बादी, फाइलों में झूठे बहाने; ​

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100 मीटर की सड़क खातिर, कब तक भटकेगी जनता अनजाने?

12 करोड़ का पुल नाले में धंसा: 100 मीटर सड़क के लिए गमाडा के आगे 60 से 65 हज़ार जनता बेहाल, विधायक व सांसद तुरंत आगे आकर युद्ध स्तर पर शुरू करवाएं काम!

​अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद भी रसूखदारों के आगे नतमस्तक गमाडा प्रशासन; आरडब्ल्यूए और यूनियनों की गुहार अनसुनी!


​दिसंबर 2017 की डेडलाइन फेल; दो बार बना, किनारों से फिर झुक रहा पुल—मिट्टी की बोरियों के सहारे बहाए सरकारी खजाने के 12 करोड़ रुपये!


​वेव एस्टेट, सेक्टर 80, 81, 82, 85, 99, 101 से 105 और सुगड़-लांडरां तक की 65 हज़ार आबादी को मिलेगा सीधा फायदा; NABI, CIAB और IISER की छवि पर बट्टा!


​ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा (पंजाब दस्तक)


मोहाली (सेक्टर 80 व 81 नाभि पुल ग्राउंड ज़ीरो से विस्तृत रिपोर्ट):

​ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA – गमाडा) की तकनीकी खामियों, भ्रामक रिपोर्टों और प्रशासनिक ढिलाई के चलते मोहाली का एक अहम प्रोजेक्ट वर्षों से अधूरा पड़ा है। सेक्टर 81 नॉलेज सिटी और सेक्टर 80 (पुराना मौली बैदवाण) की सीमा पर एन-चोए (N-Choe – मौली का बरसाती नाला) पर जनता के टैक्स के लगभग 12 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल आज भी पूरी तरह चालू नहीं हो सका है। विडंबना यह है कि महज़ 100 से 150 मीटर के मिसिंग लिंक की वजह से वेव एस्टेट, सेक्टर 80, 81, 82, 85, 99, 101, 102, 103, 104, 105, सुगड़ और लांडरां तक की 60 से 65 हजार जनता व ग्रामीण इस सीधे मार्ग की सुविधा से वंचित हैं।


​मिट्टी की बोरियों का काम, दो बार बना और किनारों से फिर झुक रहा पुल
​गमाडा के मूल प्लान के अनुसार इस पुल और संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य दिसंबर 2017 तक पूरा हो जाना चाहिए था। एन-चोए के तेज बरसाती बहाव को संभालने के लिए मजबूत आरसीसी कंक्रीट दीवार की जगह मिट्टी की बोरियां लगाकर काम चलाने की कोशिश की गई। नतीजतन, तेज पानी के बहाव में बोरियां बह गईं और पुल का संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया। दो बार निर्माण कार्य हुआ, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पुल के आगे 100 से 150 मीटर वाले हिस्से के किनारे और कोने अब भी नीचे की तरफ झुक रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तकनीकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की तय समय पर जवाबदेही तय नहीं की गई।


​विधायक और सांसद को आगे आने की सख्त जरूरत: गमाडा की झूठी रिपोर्ट बेनकाब
​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि गमाडा के चीफ इंजीनियर और संबंधित तकनीकी अधिकारियों द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधियों—मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह और आनंदपुर साहिब के सांसद मलविंदर सिंह कंग तक को गुमराह किया गया। जब भी जनप्रतिनिधियों ने इस प्रोजेक्ट की सुध लेने की कोशिश की, गमाडा के अफसरों ने उन्हें यही गलत और भ्रामक जानकारी थमा दी कि मामला अदालत में अटका है और कोर्ट केस व स्टे की वजह से काम रुका हुआ है।


​जबकि ज़मीनी व कानूनी पड़ताल से यह सच पूरी तरह उजागर हो चुका है कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने जनहित और कनेक्टिविटी को सर्वोपरि मानते हुए बहुत पहले ही अधिग्रहण और उचित मुआवजे का रास्ता साफ कर दिया था। वर्तमान में काम रोकने जैसा कोई कानूनी स्टे नहीं है। स्थानीय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), सामाजिक संगठनों और विभिन्न यूनियनों के प्रतिनिधि कई बार विधायक व सांसद महोदय से मिलकर इस समस्या के समाधान की गुहार लगा चुके हैं। अब वक्त आ गया है कि माननीय विधायक और सांसद महोदय खुद आगे आएं, अफसरों की इस झूठी रिपोर्ट को दरकिनार करें और गमाडा प्रशासन पर दबाव बनाकर इस 100-150 मीटर के पैच पर युद्ध स्तर पर काम शुरू करवाएं।


​राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की साख से जुड़ा मामला
​सेक्टर 81 नॉलेज सिटी देश का एक प्रमुख शोध केंद्र है। यहाँ भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science and Technology, Government of India) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के अधीन संचालित प्रमुख संस्थान स्थित हैं:


​NABI (नाबी): नेशनल एग्री-फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (National Agri-Food Biotechnology Institute) — कृषि एवं खाद्य जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कार्यरत राष्ट्रीय संस्थान।


​CIAB (सीआईएबी): सेंटर ऑफ इनोवेटिव एंड अप्लाइड बायोप्रोसेसिंग (Center of Innovative and Applied Bioprocessing) — कृषि अवशेषों से उन्नत उत्पाद विकसित करने वाला अनुसंधान केंद्र।


​IISER Mohali (आईसर मोहाली): इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (Indian Institute of Science Education and Research, Mohali) — उच्च विज्ञान शिक्षा एवं बुनियादी शोध का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान।


​इन संस्थानों में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक, शोधकर्ता और प्रशासनिक प्रतिनिधिमंडल आते रहते हैं। एयरपोर्ट से नॉलेज सिटी आने वाले अतिथियों को मुख्य प्रवेश के बजाय अधूरे और उबड़-खाबड़ लिंक का सामना करना पड़ता है, जिससे क्षेत्र की आधारभूत संरचना की छवि प्रभावित होती है। इसके साथ ही सेक्टर 82 का इंडस्ट्रियल एरिया और आईटी सिटी भी सीधी कनेक्टिविटी न होने का असर झेल रहे हैं।


​3 ट्रैफिक लाइटें, CP67 मार्ग और 5 किलोमीटर का लंबा चक्कर
​सीधा संपर्क मार्ग न खुलने से वेव एस्टेट, सेक्टर 80, सेक्टर 81, सेक्टर 82, सेक्टर 85, सेक्टर 99, सेक्टर 101, 102, 103, 104, 105 और रेलवे लाइन के साथ बसे बड़े-बड़े ग्रामीण अंचल—सुगड़, संभलकी, दुराली, मौली बैदवाण, मानकपुर कल्लार और लांडरां मार्ग की दैनिक आवाजाही करने वाले 60 से 65 हजार लोगों व ग्रामीणों को CP67 मॉल के रास्ते घूमकर जाना पड़ता है। हालांकि उस मार्ग पर सड़कें और लाइटिंग की व्यवस्था बेहतर है, लेकिन तीन-तीन ट्रैफिक सिग्नल पार करने और 4 से 5 किलोमीटर का अतिरिक्त फेर लगाने में रोजाना काफी समय और ईंधन खर्च होता है। 5 किलोमीटर का चक्कर काटकर लोग नाले के दूसरे छोर पर महज 100 मीटर की दूरी पर पहुंचते हैं। यदि यह 100-150 मीटर का टुकड़ा युद्ध स्तर पर जुड़ जाए, तो लांडरां और इन तमाम सेक्टरों व गांवों का ट्रैफिक सीधे एयरपोर्ट रोड (PR-7) पर आ जाएगा, जहाँ से जीरकपुर हाईवे और चंडीगढ़ (ट्रिब्यून चौक व सेक्टर 17-26) का सफर बेहद सुगम हो जाएगा।


​जनता व यूनियनों की मांग: ‘आश्वासन नहीं, तुरंत युद्ध स्तर पर हो समाधान’
​क्षेत्र की जनता, वेव एस्टेट निवासियों और तमाम यूनियनों का कहना है कि सरकारों के बदलने के बावजूद इस 100-150 मीटर के टुकड़े का समाधान नहीं निकला। अब जब यह साफ हो चुका है कि गमाडा अफसरों ने कोर्ट केस का झूठा बहाना बनाकर जनप्रतिनिधियों को भी गुमराह किया, तो जनता की नाराजगी और बढ़ गई है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि विधायक और सांसद महोदय गमाडा प्रशासन को सख्त निर्देश देकर मौके पर खड़े होकर काम करवाएं, तो महज 5 से 7 दिनों के भीतर इस 100 मीटर के टुकड़े को समतल और पक्का करके यातायात के लिए खोला जा सकता है। आगामी चुनावों से पहले 60 से 65 हजार जनता अब केवल आश्वासनों के बजाय धरातल पर ठोस काम और सीधी सड़क की शुरुआत चाहती है।


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