वरिष्ठ पत्रकार: भेषज (धर्मशाला)
धर्मशाला क्षेत्र: शहरी नतीजों के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी बिसात बिछी; हर सीट पर कड़ा मुकाबला
धर्मशाला: नगर निगम चुनाव के ऐतिहासिक मतदान के बाद अब धर्मशाला के ग्रामीण इलाकों का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। ताजा चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, धर्मशाला क्षेत्र की पंचायतों में इस बार मुकाबला बेहद कड़ा और दिलचस्प हो चुका है। जहां प्रदेश के कुछ हिस्सों में सर्वसम्मति से प्रतिनिधि चुने गए हैं, वहीं इस क्षेत्र की हर पंचायत में दो से तीन गुट आमने-सामने डटे हुए हैं। इस आक्रामक मुकाबले ने साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर साख बचाने के लिए सभी धड़ों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। गांवों में चुनावी चौपालें सज चुकी हैं और रणनीतिक बैठकों का दौर देर रात तक जारी है।
## योल छावनी व आसपास के क्षेत्र: वार्डों में जोड़-तोड़ शुरू; युवाओं और दिग्गजों के बीच कांटे की टक्कर
योल: योल और उससे सटे ग्रामीण वार्डों में पहले चरण के मतदान को लेकर सरगर्मी पूरी तरह बढ़ चुकी है। शहरी बेल्ट के करीब होने के कारण यहां के मतदाताओं का मिजाज काफी अलग दिख रहा है। पिछले चुनावों में अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके कई पुराने चेहरे इस बार अपने समर्थकों को मैदान में उतारकर कमबैक करने की फिराक में हैं। वहीं दूसरी ओर, शिक्षित और युवा उम्मीदवार इस बार पारंपरिक गुटबाजी को कड़ी चुनौती दे रहे हैं। गांवों में विकास के मुद्दों के साथ-साथ इस बात पर भी चर्चा तेज है कि किस उम्मीदवार को किस बड़े नेता का अंदरूनी समर्थन हासिल है।
## दाड़ी और सिद्धपुर क्षेत्र: चुनाव प्रचार ने पकड़ी रफ्तार; नुक्कड़ सभाओं में गूंज रहे हैं स्थानीय मुद्दे
सिद्धपुर/दाड़ी: धर्मशाला के इस प्रमुख बेल्ट में पंचायत चुनाव का प्रचार अब अपने चरम पर पहुंच गया है। मतदान की तारीखें नजदीक आते ही प्रत्याशियों ने घर-घर जाकर जनसंपर्क करने की रफ्तार दोगुनी कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने भी शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव संपन्न करवाने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस क्षेत्र की संवेदनशील पंचायतों में चुनावी समीकरण हर घंटे बदल रहे हैं। प्रत्याशी जहां एक ओर अपनी जीत पक्की करने के लिए पारिवारिक और सामाजिक समीकरणों को साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय विकास के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं।
## चड़ी और घमरोटा बेल्ट: पार्टी लाइन से हटकर स्थानीय रसूख हावी; त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
चड़ी: इस ग्रामीण क्षेत्र की पंचायतों में चुनावी जंग अब पूरी तरह से प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। हालांकि यह चुनाव आधिकारिक तौर पर पार्टी सिंबल पर नहीं लड़े जा रहे हैं, लेकिन अंदरूनी तौर पर बड़े राजनीतिक रसूखदारों का दखल साफ दिखाई दे रहा है। क्षेत्र के पुराने दिग्गजों को नए उभरते चेहरों से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिससे कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय हो चुका है। सोशल मीडिया से लेकर दीवारों पर पोस्टर वॉर शुरू हो चुका है और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए हर संभव गुणा-भाग लगाया जा रहा है।
## सराह और सकोह क्षेत्र: नुक्कड़ बैठकों का दौर तेज; महिला और युवा उम्मीदवारों ने बिगाड़ा बड़ों का गणित
सकोह: सराह और सकोह से सटे ग्रामीण इलाकों में इन दिनों राजनीतिक हलचल सबसे तेज है। पंचायत चुनाव के आगामी चरणों को देखते हुए उम्मीदवारों ने अपना-अपना वोट बैंक सुरक्षित करना शुरू कर दिया है। इस बार के चुनाव में महिला और युवा प्रत्याशियों की भारी तादाद ने पुराने सियासी पंडितों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। रात के समय होने वाली गुप्त बैठकों में वोटर्स को गोलबंद करने की रणनीति बनाई जा रही है। सड़कों की हालत और पानी जैसी बुनियादी दिक्कतों को लेकर भी प्रत्याशी जनता के बीच वादे कर रहे हैं।
## मैक्लोडगंज ग्रामीण व भागसू बेल्ट: देर रात तक बैठकों का दौर जारी; खामोश मतदाता ने बढ़ाई प्रत्याशियों की धड़कनें
भागसू/मैक्लोडगंज: इस पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी ग्राम पंचायतों में चुनावी रणभेरी बजते ही माहौल पूरी तरह राजनीतिक रंग में ढल चुका है। पहले चरण में अपनी बढ़त पक्की करने के लिए उम्मीदवारों ने प्रचार में अपनी पूरी जान झोंक दी है। दिनभर खेतों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जनसंपर्क करने के बाद, शाम होते ही रणनीतिक बैठकें की जा रही हैं। जिला परिषद और पंचायत समिति के सदस्य भी अपने-अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। इस सबके बीच आम जनता की खामोशी ने प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा रखी हैं।
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