राजेश धर्मानी ने निर्मला सीतारमण के सामने हिमाचल के मुद्दे उठाए

विदेशी सेब पर बढ़े आयात शुल्क, पहाड़ी राज्यों के लिए बदलें सड़क मानक: नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष मंत्री राजेश धर्मानी ने उठाई हिमाचल की आवाज

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​रिपोर्ट: निशान ठाकुर (ठियोग)
​पंजाब दस्तक: नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित ‘विकसित भारत सम्मेलन’ में हिमाचल प्रदेश के तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्मानी ने प्रदेश के हितों की जोरदार वकालत की। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा अधिकृत किए जाने के बाद सम्मेलन में शामिल हुए कैबिनेट मंत्री राजेश धर्मानी ने कृषि, बागवानी, सड़क, पेयजल, सिंचाई और ग्रीन एनर्जी से जुड़े अहम मुद्दों को केंद्र के समक्ष प्रमुखता से रखा। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्री, वित्त सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।


​विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग
बैठक में बागवानों के हितों की बात करते हुए मंत्री राजेश धर्मानी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में सेब का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। लेकिन विदेशों से धड़ल्ले से आ रहे सेब के कारण स्थानीय बागवानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि स्थानीय बागवानों और किसानों के संरक्षण के लिए विदेशी सेब और अन्य फलों पर तत्काल आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में बढ़ोतरी की जाए।


​सड़कों के लिए पहाड़ी राज्यों के हों अलग मानक
राजेश धर्मानी ने नाबार्ड के तहत बनने वाली सड़कों में अतिरिक्त भूमि की अनिवार्य शर्त का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले पहाड़ी राज्य में मैदानी इलाकों की तर्ज पर अतिरिक्त जमीन उपलब्ध कराना संभव नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार को पहाड़ी राज्यों के लिए सड़क निर्माण में भूमि संबंधी मानकों में विशेष छूट देनी चाहिए। साथ ही उन्होंने नाबार्ड के तहत पेयजल और सिंचाई योजनाओं के लिए जल स्रोतों में पानी की पर्याप्त उपलब्धता की सख्त शर्त में भी रियायत देने का आग्रह किया।


​ग्रीन एनर्जी और कृषि आधुनिकीकरण पर जोर
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने हिमाचल प्रदेश में ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहयोग की मांग की। इसके अलावा, पहाड़ी क्षेत्रों में श्रम शक्ति (मजदूरों) की कमी को देखते हुए उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण और मशीनरी उपलब्ध कराने में केंद्र से मदद मांगी, ताकि खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जा सके।
​सम्मेलन में कृषि परिवर्तन, कृषि बाजारों के वित्त पोषण, ऊर्जा संक्रमण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे अहम विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
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