सत्र के 9वें दिन काउंसिल चैंबर में सजी लोकतंत्र की पाठशाला; 210 छात्र-छात्राओं को स्पीकर ने समझाया संविधान, सदन और 100 साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत का मर्म
ब्यूरो चीफ: सुरेंद्र राणा
पंजाब दस्तक/शिमला:
हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय के संयुक्त निदेशक (जनसंपर्क एवं प्रोटोकॉल) हरदयाल भारद्वाज द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने दोटूक कहा है कि भारत विश्व का सबसे बड़ा, परिपक्व और सशक्त लोकतंत्र है। विधानसभा के 9वें दिन की गहमागहमी के बीच काउंसिल चैंबर परिसर में उस समय लोकतंत्र का अनूठा स्वरूप देखने को मिला, जब स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने प्रदेश के 210 भावी कर्णधारों को देश की संसदीय व्यवस्था, संविधान के मूल सिद्धांतों और सदन की मर्यादाओं का सीधा पाठ पढ़ाया। कल इस महत्वपूर्ण विधानसभा सत्र का पटाक्षेप होने जा रहा है।
शिमला के ऐतिहासिक काउंसिल चैंबर में आज सुबह ठीक 10:30 बजे राजकीय महाविद्यालय चुवाड़ी (चंबा), राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सुबाथू (सोलन), राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टूटीकंडी, सेंट बीड्स कॉलेज संजौली तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बलदेयां (शिमला) के करीब 210 छात्र-छात्राओं ने पहुंचकर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया से विशेष शिष्टाचार भेंट की।


लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर हैं लोकसभा और विधानसभा: कुलदीप पठानिया
छात्र-छात्राओं को संसदीय प्रणाली के गूढ़ तंत्र से रूबरू कराते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाएं जनता की उम्मीदों और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सर्वोच्च मंदिर हैं। उन्होंने सरल व प्रभावी ढंग से पूरी कार्यप्रणाली का खाका खींचा:
लोकसभा बनाम राज्यसभा: लोकसभा (निचला सदन) जनता का सीधा प्रतिनिधित्व करती है, जहां 543 सदस्य 5 वर्ष के लिए चुनकर आते हैं और बहुमत प्राप्त दल का नेता देश का प्रधानमंत्री बनकर मंत्रिपरिषद की कमान संभालता है। वहीं 245 सदस्यीय राज्यसभा (उच्च सदन) एक स्थायी संस्था है, जिसका कार्यकाल 6 वर्षों का होता है। इसमें 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि 12 विशिष्ट हस्तियों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है।
विधान परिषद का संदर्भ: उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़े भौगोलिक और घनी आबादी वाले राज्यों में द्विसदनीय व्यवस्था यानी विधान परिषद का प्रावधान रहता है, जबकि हिमाचल प्रदेश एक छोटा और पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां एकल सदनीय विधानसभा ही जनता की आवाज बनकर काम करती है।
काउंसिल चैंबर के 100 साला इतिहास के स्वर्णिम पन्ने
संवाद के दौरान स्पीकर ने ब्रिटिश काल से लेकर आजाद भारत तक इस ऐतिहासिक भवन के गौरवशाली सफर को बेहद रोचक अंदाज में साझा किया:
1920 से 1925 का निर्माण काल: इस ऐतिहासिक भवन का निर्माण तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत ने राष्ट्रीय असेंबली के संचालन के लिए शुरू कराया था। 1920 में शुरू हुआ यह कार्य 1925 में 5 वर्षों की कड़ी मेहनत और उस दौर के 10 लाख रुपये की लागत से पूरा हुआ।
विट्ठलभाई पटेल की ऐतिहासिक विजय: स्पीकर ने याद दिलाया कि सर फ्रेडरिक व्हाईट असेंबली के पहले मनोनीत स्पीकर थे, लेकिन 1925 में विट्ठलभाई पटेल ने अपने अंग्रेज प्रतिद्वंद्वी को महज 2 वोटों से हराकर इसी सदन में पहले भारतीय निर्वाचित अध्यक्ष बनने का इतिहास रचा था।
क्रांतिकारी फैसलों का साक्षी: यह वही पावन सदन है जहां देश में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने की ऐतिहासिक पहल हुई और आजादी के आंदोलन को धार देने वाले ‘भारत छोड़ो’ जैसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों की गूंज उठी।
1925 की ऐतिहासिक कुर्सी: पठानिया ने यह भी बताया कि आज जिस मुख्य आसन पर बैठकर वह सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं, वह ऐतिहासिक कुर्सी भी 1925 में बर्मा सरकार द्वारा तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को उपहार स्वरूप सौंपी गई थी।
ऐसी धारदार और निष्पक्ष खबरों के लिए देखते रहें पंजाब दस्तक। अपना चैनल सब्सक्राइब करें, लाइक करें और फॉलो करें पंजाब दस्तक।

