विशेष रिपोर्ट: हिमाचल प्रदेश (पंजाब दस्तक)
हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में सरकारी कामकाज और फील्ड ड्यूटी के लिए अनुबंधित (Hire) की गई टैक्सियों और प्राइवेट गाड़ियों के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का एक और बड़ा मामला सामने आया है। ‘पंजाब दस्तक’ की जांच में यह बात सामने आई है कि जनहित और विभागीय कार्यों के नाम पर जनता के पैसों से ली गई इन गाड़ियों का इस्तेमाल अब अफसरों और उनके चहेतों की निजी ऐश-परस्ती के लिए हो रहा है।
सरकारी तेल, सरकारी टैक्सी… लेकिन सैर-सपाटा निजी!
नियमों के मुताबिक, विभागों द्वारा ली गई ये टैक्सियां सिर्फ और सिर्फ आधिकारिक कार्यों, निरीक्षणों और विभागीय दौरों के लिए इस्तेमाल होनी चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
अधिकारी इन अनुबंधित गाड़ियों का इस्तेमाल अपने निजी काम निपटाने, बाजारों में खरीदारी करने और परिजनों को घुमाने के लिए कर रहे हैं। यहां तक कि कई जगहों पर अधिकारियों के बच्चे और रिश्तेदार सरकारी खर्चे पर चल रही इन टैक्सियों में घूमते नजर आ रहे हैं।
बिलों में भारी हेरफेर और फर्जी लॉगबुक का खेल
सूत्रों के अनुसार, टैक्सियों के मासिक बिलों और किलोमीटर की रीडिंग में भी बड़े पैमाने पर हेरफेर किया जा रहा है। निजी यात्राओं को सरकारी दौरा दिखाकर फर्जी लॉगबुक तैयार की जाती है और जनता के टैक्स का पैसा सीधे इन बिलों के भुगतान में बहाया जा रहा है।
विभागीय साठगांठ के कारण कोई भी अधिकारी इन गाड़ियों की वास्तविक आवाजाही और लॉगबुक की जांच करने की जहमत नहीं उठाता।
पंजाब दस्तक की सीधी चेतावनी: लिस्ट तैयार, जल्द होंगे नाम उजागर!
सुधर जाएं अफसर, नहीं तो बेनकाब होंगे चेहरे!
पंजाब दस्तक के पास ऐसे कई विभागों और अफसरों की पूरी सूची, गाड़ियों के नंबर और उनकी लोकेशन रिपोर्ट पहुंच चुकी है, जो सरकारी टैक्सियों का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।
यदि तुरंत इन टैक्सियों का गलत इस्तेमाल बंद नहीं किया गया, तो पंजाब दस्तक गाड़ियों के नंबरों और संबंधित अधिकारियों के नामों के साथ पूरी सूची सार्वजनिक करेगा। सरकारी खजाने पर यह डाका अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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