पंजाब दस्तक
विशेष रिपोर्ट: उमांशी राणा (वरिष्ठ पत्रकार)
हमीरपुर। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में ₹60 करोड़ की लागत से होने वाली फर्नीचर खरीद प्रक्रिया बड़े विवादों और भ्रष्टाचार के घेरे में आ गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने एक धमाकेदार प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुक्खू सरकार और कॉलेज प्रशासन पर तीखे हमले बोलते हुए इस पूरी प्रक्रिया को ‘पूर्व-नियोजित खेल’ करार दिया है। उन्होंने सीधा और सुलगता हुआ सवाल दागा कि जब केंद्र से पर्याप्त बजट दो साल पहले ही मिल चुका था, तो आखिर किसके इशारे पर इस खरीद को दबाकर रखा गया और अब इसमें मर्जी की शर्तें क्यों थोपी जा रही हैं?
पसंदीदा ‘मित्र’ को रेवड़ी बांटने की तैयारी: नियमों को ठेंगा
वरिष्ठ पत्रकार उमांशी राणा की रिपोर्ट के मुताबिक, राजेंद्र राणा ने टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर उंगलियां उठाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर के नियमों और शर्तों को इस कदर तोड़-मरोड़ कर तैयार किया जा रहा है, जिससे सिर्फ और सिर्फ एक ही चहेती फर्म इसके लिए क्वालीफाई कर सके।
राणा ने कड़े शब्दों में कहा:
”यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का मामला है। शर्तें ऐसी बनाई गई हैं कि राज्य और देश की अन्य प्रतिष्ठित फर्में प्रतिस्पर्धा से पहले ही बाहर हो जाएं। केंद्र सरकार ने इस मेडिकल कॉलेज की कायाकल्प के लिए ₹189 करोड़ की भारी-भरकम राशि मंजूर की थी, जिसमें फर्नीचर की खरीद भी शामिल थी। लेकिन दो साल तक इस पैसे पर कुंडली मारकर बैठे रहने का असली मकसद अब सामने आ रहा है ताकि अपने पसंदीदा लोगों को उपकृत किया जा सके।”
खजाना खाली होने का रोना बनाम ‘मित्रों’ पर करोड़ों की फिजूलखर्ची
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजेंद्र राणा ने सरकार के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री और उनके मंत्री लगातार प्रदेश का खजाना खाली होने का रोना रोकर विकास कार्यों पर ब्रेक लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने खास ‘मित्रों’ को कैबिनेट रैंक और मोटी सैलरी वाले पदों पर बैकडोर से तैनात किया जा रहा है। जनता की गाढ़ी कमाई को इस तरह से लुटाना प्रदेश की जनता के साथ सरासर धोखा है।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में विकास ठप, अनुराग ठाकुर पर सवाल उठाने वाले पहले खुद दें जवाब
केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग ठाकुर से उनके कार्यकाल का हिसाब मांगने वाले कांग्रेसी नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए राणा ने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने वाले पहले खुद के गिरेबां में झांकें।
उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा:
”आज प्रदेश के मुख्यमंत्री इसी हमीरपुर जिले से आते हैं। यह बड़े गर्व की बात हो सकती थी, लेकिन धरातल पर हकीकत शून्य है। मुख्यमंत्री स्वयं बताएं कि उन्होंने पिछले साढ़े तीन-चार सालों में हमीरपुर जिला के चौमुखी विकास के लिए कौन सी एक भी बड़ी या ऐतिहासिक योजना दी है? आज हमीरपुर का विकास पूरी तरह ठप पड़ा है और मुख्यमंत्री के गृह जिले की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।”
चुनाव आते ही याद आईं माताएं-बहनें: ₹1500 का चुनावी झुनझुना
महिलाओं को ₹1500 सम्मान राशि देने के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए राजेंद्र राणा ने कहा कि सत्ता सुख भोगने के पूरे चार साल बाद, जब चुनाव सिर पर आ गए हैं, तब जाकर सरकार को महिलाओं की याद आ रही है। यह सिर्फ और सिर्फ चुनावी लाभ लेने के लिए फेंका गया एक झुनझुना है, जिसे हिमाचल की जागरूक जनता और माताएं-बहनें भली-भांति समझती हैं। उन्होंने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वे इस भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं।
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