पंजाब दस्तक
वरिष्ठ पत्रकार: उमांशी राणा, हमीरपुर
हिमाचल प्रदेश में चुनावी वादों और जमीनी हकीकत के बीच पिस रही जनता को बिजली बोर्ड ने एक और बड़ा झटका दिया है। विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस द्वारा दी गई 300 यूनिट मुफ्त बिजली की गारंटी तो साढ़े तीन साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी, बल्कि इसके विपरीत अब उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया गया है। बिजली बोर्ड द्वारा 30 मई को जारी अधिसूचना के बाद अब प्रदेश के सभी 28 लाख घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं से फ्यूल चार्ज (ईंधन एवं बिजली खरीद समायोजन अधिभार) वसूला जा रहा है।
अधिसूचना की इनसाइड स्टोरी: क्यों बढ़ा यह बोझ?
बिजली बोर्ड की इस नई अधिसूचना पर गौर करें तो यह साफ होता है कि बोर्ड अपनी बिजली खरीद और उत्पादन की बढ़ी हुई कीमतों का सीधा बोझ आम जनता पर डाल रहा है। तकनीकी भाषा में इसे ‘फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट’ (FPPCA) कहा जाता है। नियम के मुताबिक, बाहरी राज्यों या थर्मल प्लांटों से महंगी बिजली खरीदने पर जो अतिरिक्त खर्च आता है, उसे फ्यूल चार्ज के रूप में रिकवर किया जाता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि प्रशासनिक कमियों और बिजली बोर्ड के घाटे का हर्जाना हमेशा सीधे उपभोक्ताओं को ही क्यों भुगतना पड़ता है?
खपत के हिसाब से जेब पर सीधा असर
इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, प्रति यूनिट खपत के आधार पर अतिरिक्त शुल्क तय किया गया है। प्रारंभिक आंकड़ों और गणना के अनुसार:
जो उपभोक्ता 100 यूनिट तक बिजली की खपत कर रहे हैं, उन पर लगभग ₹33 से ₹50 तक का सीधा अतिरिक्त असर पड़ रहा है।
अधिक खपत वाले परिवारों और व्यावसायिक कनेक्शनों पर यह मार और ज्यादा है, जिससे मासिक बिलों में ₹50 से लेकर ₹150 तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
सोशल मीडिया पर जनता का फूटा गुस्सा
मई महीने के जो बिजली बिल जून में जारी हो रहे हैं, वे इस नए फ्यूल चार्ज के साथ आ रहे हैं। बढ़े हुए बिलों को देखकर हैरान-परेशान लोग अब सोशल मीडिया पर अपने बिलों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं। उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि पहले से ही कई तरह के सेस (उपकर) और टैक्स देने के बाद अब इस नए चार्ज ने आम परिवार के बजट को पूरी तरह बिगाड़ कर रख दिया है। मुफ्त बिजली की आस लगाए बैठी जनता अब खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
पंजाब दस्तक को सब्सक्राइब करें और फेसबुक पर फॉलो करें।
