शिमला की किस्मत बदलने वाले रोपवे प्रोजेक्ट का काउंटडाउन शुरू, कैबिनेट फैसले पर टिकी नजरें

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शिमला | ब्यूरो चीफ, सुरेंद्र राणा:हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला को ट्रैफिक के पुराने मर्ज से स्थाई निजात दिलाने के लिए प्रस्तावित 13.79 किलोमीटर लंबे रोपवे प्रोजेक्ट की फाइल अब कैबिनेट की मेज पर पहुंच गई है। विश्व के दूसरे सबसे लंबे रोपवे के रूप में पहचान बनाने वाले इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर अब अंतिम निर्णय की घड़ी आ गई है।डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की पहली बैठक से मिली थी संजीवनीइस ड्रीम प्रोजेक्ट की नींव को मजबूती तब मिली थी जब उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विभाग के आला अधिकारियों के साथ पहली उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की थी। उस बैठक में ही उन्होंने साफ कर दिया था कि शिमला की संकरी सड़कों का एकमात्र समाधान ‘रोपवे’ ही है। उन्होंने निर्देश दिए थे कि प्रोजेक्ट में किसी भी प्रकार की देरी न हो। डिप्टी सीएम की उसी सक्रियता का नतीजा है कि आज यह फाइल कैबिनेट की मंजूरी तक पहुंची है।सिंगल टेंडर का पेच: पारदर्शिता और नियमों पर मंथनखबर का सबसे अहम पहलू यह है कि इस विशालकाय प्रोजेक्ट के लिए फिलहाल केवल एक ही कंपनी (Single Tender) ने टेंडर भरा है। अब सरकार के सामने यह बड़ी चुनौती है कि क्या इतने बड़े प्रोजेक्ट को एक ही कंपनी के हवाले कर दिया जाए या फिर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए दोबारा ‘शॉर्ट टेंडर’ आमंत्रित किए जाएं। इसी बिंदु पर कैबिनेट में गहन मंथन होना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के तकनीकी या कानूनी विवाद की स्थिति पैदा न हो।प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षण और लाभ:लागत में कटौती: पहले लागत 2800 करोड़ रुपये आँकी गई थी, लेकिन सरकार की प्रभावी वार्ता के बाद अब इसे 2300 करोड़ रुपये में पूरा करने की सहमति बनी है।रूट का विस्तार: तारादेवी से शुरू होकर यह रोपवे चक्कर, टूटीकंडी, आईएसबीटी, रेलवे स्टेशन, ओल्ड बस स्टैंड, छोटा शिमला और संजौली होते हुए लक्कड़ बाजार तक कनेक्टिविटी देगा।जाम से राहत: इसके धरातल पर उतरते ही शहर के मुख्य मार्गों से 70-80% वाहनों का बोझ कम होने का अनुमान है।फंडिंग मॉडल: कुल लागत का 80% हिस्सा न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) वहन करेगा, जबकि 20% राज्य सरकार देगी।निष्कर्षशिमला के लिए यह प्रोजेक्ट केवल एक सुविधा नहीं बल्कि एक आधुनिक जरूरत है। मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट को अब यह तय करना है कि वे इस ‘सिंगल टेंडर’ के साथ आगे बढ़ते हैं या फिर नई निविदा प्रक्रिया अपनाते हैं। प्रदेश के विकास और राजधानी की सुंदरता को बचाने के लिए यह फैसला ऐतिहासिक होने वाला है।

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