शिमला: सुरेंद्र राणा,हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सरकार को हाईकोर्ट से एक और बड़ा झटका लगा है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा डिप्टी कमिश्नरों को दी गई 5 फीसदी सीटें आरक्षित करने की शक्तियों पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ किया है कि यदि इन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कोई आरक्षण रोस्टर जारी किया गया है, तो उस पर भी तुरंत प्रभाव से रोक रहेगी। साथ ही हाईकोर्ट ने सभी डीसी को निर्देश दिए हैं कि वे 7 अप्रैल तक हर हाल में पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी करें।
इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील नंदलाल ठाकुर ने बताया कि 30 मार्च की नोटिफिकेशन के तहत प्रदेश सरकार ने एक विशेष प्रावधान के जरिए डिप्टी कमिश्नरों को 5 फीसदी सीटें अपने विवेक से आरक्षित करने की शक्ति दी थी। उन्होंने कहा कि यह शक्ति जियोग्राफिकल और अन्य विशेष परिस्थितियों के आधार पर दी गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षण केवल जनसंख्या के आधार पर ही किया जा सकता है, जैसा कि पंचायती राज एक्ट और नियमों में निर्धारित है। नंदलाल ठाकुर नें बताया कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और अन्य निर्धारित श्रेणियों के लिए है, और राज्य सरकार को इस दायरे से बाहर जाकर कोई नई व्यवस्था बनाने का अधिकार नहीं है।उन्होंने यह भी बताया कि एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि प्रदेश में रोस्टर लागू कर दिया गया है, लेकिन कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि जहां-जहां 5 फीसदी आरक्षण का उपयोग किया गया है, उसे संशोधित कर 7 अप्रैल शाम 5 बजे तक नया रोस्टर जारी किया जाए।
