हिमाचल में सब्जी मंडियों की मंदी और बाजार की महंगाई ने तोड़ी किसानों की कमर: सोया हुआ है प्रशासन, डीएफसी विभाग मौन

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ब्यूरो चीफ, सुरेंद्र राणा; शिमला/हमीरपुर/कांगड़ा: हिमाचल प्रदेश की सब्जी मंडियों में इन दिनों किसानों और बागवानों के साथ सरेआम लूट का खेल चल रहा है, लेकिन प्रदेश का प्रशासन और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (DFC Food & Civil Supplies) गहरी नींद में सोया हुआ है। सोलन, ढली, कांगड़ा और हमीरपुर जैसी बड़ी मंडियों में सब्जियों और फलों की आवक प्रचुर मात्रा में है, जिसके कारण थोक भाव धड़ाम हो गए हैं। बावजूद इसके, खुदरा बाजारों में आम जनता को सब्जियां और फल आसमान छूते दामों पर खरीदने पड़ रहे हैं।थोक में मंदी, रिटेल में लूट: कहाँ हैं इंस्पेक्टर?थोक मंडियों में आज मटर 27 से 40 रुपये, फूलगोभी 12 से 20 रुपये और पत्तागोभी मात्र 8 से 15 रुपये प्रति किलो बिक रही है। आलू 12 से 18 रुपये, प्याज 15 से 22 रुपये और टमाटर 20 से 30 रुपये के भाव पर उपलब्ध है। बैंगन 10 से 15 रुपये किलो सिमट गया है, जबकि फलों में केला 35-42 रुपये दर्जन और अंगूर 50-70 रुपये किलो थोक में बिक रहा है। हैरानी की बात यह है कि यही चीजें बाजार में पहुँचते ही दोगुनी-तिगुनी महंगी हो जाती हैं। रिटेल दुकानों पर न तो रेट लिस्ट लगी है और न ही विभाग के इंस्पेक्टर चेकिंग कर रहे हैं। बिचौलियों और मुनाफाखोरों की इस मनमानी से न तो मेहनत करने वाले किसान को सही दाम मिल रहा है और न ही आम जनता को राहत।प्रशासन की अनदेखी से सरकार की छवि पर दागप्रदेश के हर जिले में जिलाधीश महोदय और डीएफसी (DFC) विभाग की यह जिम्मेदारी है कि वे बाजारों में रेट लिस्ट सुनिश्चित करवाएं और औचक निरीक्षण करें। लेकिन धरातल पर प्रशासन पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। अधिकारियों की इस सुस्ती के कारण सरकार की छवि खराब हो रही है। जनता में भारी रोष है कि जब मंडियों में रेट कम हैं, तो दुकानों पर लूट क्यों मची है? इंस्पेक्टरों का फील्ड में न होना और रेट लिस्ट का गायब होना सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।किसानों और बागवानों की मांगहमीरपुर, कांगड़ा और सोलन के बागवानों का कहना है कि खाद, बीज और माल ढुलाई की बढ़ती लागत के बीच उन्हें मंडी में अपनी फसल कौड़ियों के भाव बेचनी पड़ रही है। किसानों ने मांग की है कि प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग तुरंत संज्ञान ले और मंडियों से लेकर रिटेल दुकानों तक सख्त चेकिंग अभियान चलाए। अगर समय रहते मुनाफाखोरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो किसानों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा जाएगी।

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