शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 54,928 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जिसके साथ ही प्रदेश की सियासत गरमा गई है। सरकार ने जहां बजट को विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक संतुलन की दिशा में बड़ा कदम बताया है, वहीं विपक्ष ने इसे नीरस, घाटे वाला और आर्थिक संकट को बढ़ाने वाला करार दिया है। बजट में वर्ष 2025-26 के लिए 8.3 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर, 2,83,626 रुपये प्रति व्यक्ति आय और 2.54 लाख करोड़ रुपये जीएसडीपी का अनुमान जताया गया है।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आरडीजी बंद होने के कारण बजट का आकार घटाना पड़ा है और मौजूदा वित्तीय हालात चुनौतीपूर्ण हैं। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि संकट के समय पार्टी प्रदेश के साथ नहीं खड़ी हुई। उन्होंने बताया कि वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए अस्थायी वेतन स्थगन जैसे कड़े फैसले लेने पड़े हैं, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों। कहा कि यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध बनाने की दिशा में तैयार किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन और पर्यटन क्षेत्रों में सुधार के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा देने की बात भी उन्होंने कही। वही मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा की भाजपा हिमाचल विरोधी होने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने बजट को 9,668 करोड़ रुपये के घाटे वाला और पूरी तरह नीरस बताया। उन्होंने कहा कि चार घंटे से ज्यादा लंबा बजट भाषण केवल इसलिए पढ़ा गया क्योंकि उसमें ठोस था ही नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट विकास को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाने वाला है और प्रदेश वित्तीय आपातकाल की ओर बढ़ रहा है। जयराम ठाकुर ने कहा कि वेतन स्थगन का फैसला सरकार की कमजोर आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने विधायक क्षेत्र विकास निधि में कटौती को जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर हमला बताते हुए सरकार पर केवल राजनीतिक समय निकालने का आरोप लगाया।
