📢शिमला (छराबड़ा): लोकतंत्र का चौथा स्तंभ अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, लेकिन प्रशासन का रवैया इसे दबाने वाला नजर आ रहा है। शिमला के छराबड़ा में हरियाणा के विधायकों की कवरेज के दौरान सड़क किनारे खड़े होकर अपना कर्तव्य निभा रहे पत्रकार के साथ पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी और धक्का-मुक्की की पंजाब दस्तक कड़ी निंदा करता है।जन-जन की आवाज़ पहुँचाना अपराध नहीं:पंजाब दस्तक के ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि लाइव वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पत्रकार सड़क के बिल्कुल किनारे शांतिपूर्वक अपना काम कर रहे थे। वे किसी भी प्रकार से यातायात या किसी अन्य कार्य में बाधा (Barden) नहीं डाल रहे थे। उनका एकमात्र उद्देश्य जनता तक जानकारी पहुँचाना था।मुख्य आपत्ति:बिना कारण धक्का-मुक्की: जब पत्रकार पूरी मर्यादा में सड़क किनारे था, तो पुलिस द्वारा उन्हें धक्का देना और अभद्र भाषा का प्रयोग करना उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाता है।ड्यूटी का सम्मान: पुलिस की तरह ही पत्रकार भी 24 घंटे अपनी ड्यूटी पर तैनात रहते हैं। किनारे पर खड़े होकर अपना काम कर रहे पत्रकार के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र के लिए घातक है। ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा और पूरी पंजाब दस्तक टीम अपने पत्रकार साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। हम प्रशासन से इस घटना पर कड़ा संज्ञान लेने की मांग करते हैं।”पत्रकार की आवाज़ जनता की आवाज़ है। सड़क किनारे खड़े होकर सच्चाई दिखाने वाले पत्रकार को रोकना प्रेस की स्वतंत्रता का अपमान है।”
