कांगड़ा भाजपा में ‘फोटो पॉलिटिक्स’ से सियासत गरमाई, उपराष्ट्रपति स्वागत की तस्वीरों ने उजागर की अंदरूनी खींचतान

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बी.के. ठाकुर, कांगड़ा : उपराष्ट्रपति के स्वागत के दौरान ली गई तस्वीरों ने कांगड़ा–धर्मशाला भाजपा की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। कार्यक्रम के बाद भाजपा नेता सुधीर शर्मा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर स्वागत की तस्वीरें साझा कीं, जिनमें मंच और कार्यक्रम स्थल पर मौजूद सभी नेता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। लेकिन जब वही तस्वीरें कांगड़ा से भाजपा विधायक पवन काजल ने अपने सोशल मीडिया पर साझा कीं तो राजनीतिक हलकों की नजर एक खास बात पर टिक गई। चर्चा है कि साझा की गई तस्वीरों में से सुधीर शर्मा को क्रॉप कर हटाया गया। इसके बाद से भाजपा के भीतर दोनों नेताओं के बीच चल रही खींचतान की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांगड़ा और धर्मशाला की राजनीति में दोनों नेताओं के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता रही है, जो पहले कांग्रेस के दौर से चली आ रही थी। अब दोनों नेता भाजपा में होने के बावजूद वही प्रतिस्पर्धा अलग अंदाज में सामने आ रही है।
सूत्रों का कहना है कि भविष्य में मंत्री पद की संभावनाओं को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, विधायक पवन काजल के सामने हाल के दिनों में कुछ स्थानीय मुद्दों—जैसे एयरपोर्ट विस्तार और (एनएचएआई) से जुड़े सड़क मामलों—को लेकर भी राजनीतिक दबाव की स्थिति बनी हुई बताई जा रही है।
फिलहाल कांगड़ा भाजपा में नेताओं के बीच अंदरूनी खींचतान की चर्चा सियासी गलियारों में जोर पकड़ रही है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा किस दिशा में जाएगी, इस पर सभी की नजर टिकी हुई है।

2019 लोकसभा चुनाव से गहराई खाई

कांगड़ा–धर्मशाला की राजनीति में सुधीर शर्मा और पवन काजल के बीच मतभेद कोई नया मामला नहीं है। राजनीतिक हलकों में माना जाता है कि दोनों नेताओं के बीच दूरी 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ज्यादा बढ़ी। राजनीतिक पंडितों की मानें तो उस समय कांग्रेस में लोकसभा टिकट को लेकर समीकरण बदले थे। चर्चा रही कि सुधीर शर्मा ने स्वयं चुनाव लड़ने से इनकार किया और पार्टी नेतृत्व को पवन काजल को मैदान में उतारने के लिए राजी किया। इसके बाद पवन काजल ने कांगड़ा-चंबा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भाजपा उम्मीदवार किशन कपूर के हाथों करीब 5.15 लाख वोटों से करारी हार झेलनी पड़ी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसी चुनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच ‘कोल्ड वॉर’ की शुरुआत मानी जाती है। बाद में कांग्रेस के अंदर बढ़ती खेमेबाजी से नाराज होकर पवन काजल ने भाजपा का दामन थाम लिया। कुछ समय बाद सुधीर शर्मा भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। इन घटनाओं के बाद से दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार चर्चा में बनी हुई है। सियासी गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि मौजूदा समय में भाजपा के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने की कवायद के बीच यह प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

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