हिम बस कार्ड का महिलाओं ने किया विरोध, जनवादी महिला समिति ने किया HRTC प्रबंध निदेशक कार्यालय का घेराव

Spread the love

शिमला, सुरेंद्र राणा; हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के लिए बसों में 50 प्रतिशत रियायती सफर के लिए हिम बस कार्ड अनिवार्य किए जाने के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। सरकार ने 31 मार्च तक हिम बस कार्ड बनवाना अनिवार्य किया है, जिसके बाद बिना कार्ड के महिलाओं से पूरा किराया लिया जाएगा।
इस निर्णय के विरोध में जनवादी महिला समिति ने आज शिमला में हिमाचल पथ परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक कार्यालय का घेराव किया और बिना हिम बस कार्ड के ही महिलाओं को 50 प्रतिशत रियायती सफर जारी रखने की मांग उठाई।

जनवादी महिला समिति की राज्य सचिव फालमा चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार को अन्य राज्यों से सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब सहित कई राज्यों में महिलाएं केवल आधार कार्ड दिखाकर बसों में रियायती सफर कर सकती हैं, जबकि हिमाचल में इसके लिए अलग से कार्ड अनिवार्य किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश सरकार एचआरटीसी का लगातार निजीकरण कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं मुख्य रूप से बसों पर ही निर्भर रहती हैं, क्योंकि वहां परिवहन की अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कहा कि सरकार ने हाल ही में स्कूल बस पास के किराए में भी बढ़ोतरी की है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार महिलाओं और बच्चों पर आर्थिक बोझ डालकर निगम को घाटे से बाहर निकालना चाहती है।उन्होंने मांग की कि महिलाओं को बसों में बिना किसी शर्त के 50 प्रतिशत रियायती सफर की सुविधा जारी रखी जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *