सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ)शिमला/हमीरपुर: हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और पर्यटन विकास निगम (HPTDC) के लगातार बढ़ते घाटे को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के 8 प्रमुख सरकारी होटलों को अब निजी हाथों (Private Operators) में सौंपने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सरकार ने इन होटलों को ‘ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस’ (O&M) आधार पर लीज पर देने का आधिकारिक निर्णय लिया है।क्या है ‘O&M’ मॉडल? (समझें पूरी प्रक्रिया)आम जनता और पाठकों को यह समझना ज़रूरी है कि आखिर यह O&M मॉडल क्या है और इससे क्या बदलेगा?O (Operation – संचालन): अब इन होटलों को चलाने, बुकिंग लेने, स्टाफ मैनेज करने और ग्राहकों को सर्विस देने की पूरी जिम्मेदारी निजी कंपनी की होगी।M (Maintenance – रखरखाव): होटल की बिल्डिंग की मरम्मत, साफ-सफाई और बिजली-पानी जैसे रख-रखाव का काम भी निजी कंपनी ही देखेगी।मालिकाना हक: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन होटलों की जमीन और संपत्ति पर मालिकाना हक हिमाचल सरकार का ही रहेगा, बस उसे चलाने का ठेका निजी कंपनी को दिया गया है। इसके बदले कंपनी सरकार को एक तय मोटी रकम देगी, जिससे सरकार का घाटा कम होगा।इन 8 होटलों की सूची आई सामने:पर्यटन निगम ने जिन होटलों को निजी हाथों में देने के लिए शॉर्टलिस्ट किया है, उनमें:बिलासपुर का होटल लेक-व्यूमंडी का होटल ममलेश्वर 3. शिमला का एप्पल ब्लॉसमकुल्लू का होटल सरवरीकसौली का ओल्ड रोसकॉमनपरवाणू का होटल शिवालिकरोहड़ू का होटल चांशलखड़ापत्थर का होटल गिरिगंगा शामिल हैं।विपक्ष का तीखा हमला: “हिमाचल ऑन सेल”इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति में भारी उबाल आ गया है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे “हिमाचल ऑन सेल” की नीति करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य की बेशकीमती संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपकर प्रदेश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
