ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा की विशेष रिपोर्टऐतिहासिक फैसला: मंदिरों की आय पर अब केवल ‘देवता’ और ‘श्रद्धालुओं’ का हक; हिमाचल हाई कोर्ट का कड़ा आदेश

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पंजाब दस्तक ॥
​ब्यूरो चीफ सुरेंद्र राणा की विशेष रिपोर्ट
​ऐतिहासिक फैसला: मंदिरों की आय पर अब केवल ‘देवता’ और ‘श्रद्धालुओं’ का हक; हिमाचल हाई कोर्ट का कड़ा आदेश


​शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिरों के प्रबंधन को लेकर एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश पारित किया है कि मंदिरों, शक्तिपीठों और धार्मिक स्थलों के चढ़ावे या संपत्ति से होने वाली आय का इस्तेमाल अब किसी भी दूसरे सरकारी, प्रशासनिक या गैर-धार्मिक कार्यों में नहीं किया जा सकेगा।
​”मंदिर का पैसा देवता का है, सरकार का नहीं”
​माननीय न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी। कोर्ट ने अपने आदेश में कड़ाई से रेखांकित किया कि श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक दान किया गया पैसा केवल उसी उद्देश्य के लिए खर्च होना चाहिए जिसके लिए वह अर्पित किया गया है। अक्सर देखा गया है कि मंदिर न्यासों (Temple Trusts) के फंड का उपयोग सड़कों के निर्माण, पुलों या अन्य सरकारी योजनाओं में कर दिया जाता है, जिसे अब अदालत ने पूरी तरह से ‘असंगत’ करार दिया है।
​फैसले के मुख्य बिंदु और कड़े निर्देश:
​फंड का डायवर्जन तत्काल बंद: प्रदेश सरकार या जिला प्रशासन अब मंदिरों के फंड को उन सार्वजनिक कल्याणकारी योजनाओं के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते जो मंदिर परिसर या धार्मिक गतिविधियों से संबंधित न हों।
​श्रद्धालुओं की सुविधाएं सर्वोच्च प्राथमिकता: कोर्ट ने आदेश दिया कि मंदिर की आय का पहला और प्राथमिक उपयोग मंदिर के जीर्णोद्धार, धार्मिक अनुष्ठानों और वहां आने वाले भक्तों को बेहतर सुविधाएं (जैसे सराय, पेयजल, सुरक्षा और स्वच्छता) देने पर होना चाहिए।
​पारदर्शिता और ऑडिट: अदालत ने मंदिर प्रबंधन को कड़े निर्देश दिए हैं कि आय-व्यय का पूरा रिकॉर्ड पारदर्शी रखा जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पैसा केवल तय दायरे में ही खर्च हो रहा है।
​धार्मिक संस्थाओं और भक्तों में हर्ष
​इस फैसले के बाद प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों और सिद्ध पीठों के पुजारियों व श्रद्धालुओं में खुशी की लहर है। जानकारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक निर्णय से मंदिरों के बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार आएगा और भक्तों के चढ़ावे का सदुपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।

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