Punjab Dastak
सुरेंद्र राणा (ब्यूरो चीफ)
हिमाचल सदन में दिल्ली पुलिस की ‘आधी रात’ वाली दबिश: सुरक्षा के नाम पर मर्यादा तार-तार, प्रशासन में भारी रोष
नई दिल्ली: राजधानी स्थित हिमाचल सदन में बीती रात दिल्ली पुलिस की ओर से की गई अचानक छापेमारी ने एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। रात के करीब 12:30 बजे जब सदन में लोग विश्राम कर रहे थे, तब भारी पुलिस बल ने बिना किसी पूर्व सूचना के परिसर में दबिश दी। इस घटना ने न केवल सदन की गरिमा को ठेस पहुँचाई है, बल्कि दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर भी तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रमुख तथ्य और प्रशासनिक सवाल:
मर्यादा का उल्लंघन: किसी भी राज्य के सदन में प्रवेश के लिए एक विशेष प्रोटोकॉल होता है। रात 12:30 बजे की यह कार्रवाई उस स्थापित परंपरा का सीधा उल्लंघन है।
इंटेलिजेंस पर सवाल: यदि प्रशासन को किसी विशेष संदिग्ध पर शक था, तो केवल उसे ही टारगेट क्यों नहीं किया गया? पूरे सदन परिसर और निर्दोष लोगों को मानसिक रूप से परेशान करना पुलिस की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
विकल्प की अनदेखी: यदि मामला कोई आपातकालीन सुरक्षा से जुड़ा नहीं था, तो वही जांच दिन के उजाले में मर्यादित तरीके से भी की जा सकती थी।
ब्यूरो की तीखी टिप्पणी:
”सुरक्षा और जांच के नाम पर किसी प्रतिष्ठित संस्थान की शांति और नागरिकों की निजता को दांव पर लगाना कतई स्वीकार्य नहीं है। दिल्ली पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर उनकी ‘इंटेलिजेंस’ इतनी कमजोर क्यों थी कि एक संदिग्ध की तलाश के लिए उन्हें पूरे हिमाचल सदन की नींद हराम करनी पड़ी? क्या यह जांच थी या केवल शक्ति प्रदर्शन? प्रशासन को जवाब देना होगा कि आखिर एक व्यक्ति के शक के आधार पर दर्जनों निर्दोष लोगों को आधी रात को प्रताड़ित करने का अधिकार उन्हें किसने दिया?”
