अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि में देव परंपरा का अनोखा विरोध, टेंट छोड़ बाहर बैठे देवता

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कुल्लू, काजल: पैगोड़ा टेंट को छोडक़र देवता उनके बाहर बैठें हैं। नईं पैगोडा व्यवस्था को लेकर देवता नाराज हुए हैं और नाराजगी जताते हुए उन्होंने टेंट के बाहर ही दरबार सजा लिया है। टेंट के बाहर बैठकर देवता भक्तों को आशीर्वाद दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के दौरान छोटी काशी मंडी में देव पंरपरा का अनोखा विरोध देखा जा रहा है। मंडी को कार बांधकर बीमारियों और महामारियों से बचाने वाले देवता आदि ब्रह्मा प्रशासन द्वारा दिए गए पैगोडा शैली के टेंट से बाहर कमल पुष्प में विराजमान हुए हैं। मंगलवार को पड्डल सीढिय़ों पर विराजने आए देवता भी नाराज होकर पड्डल मैदान में चले आए। देवी-देवताओं के साथ आए कारदारों का कहना है कि प्रशासन द्वारा पुराने टेंट लगाकर इसे पैंगोड़ा का नाम दे दिया गया है।

न ही देवता के बैठने के स्थल पर साफ-सफाई है और न ही यहां बैठने का उचित प्रबंध है, इसलिए देवता इन स्थानों पर नहीं बैठ रहे हैं। देव कारदार और देव संस्कृति के साथ जुड़े निखिल आहुलवालिया का कहना है कि देवता समिति को पहले ही देवताओं से संपर्क करना चाहिए था।

अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में इस बार एक अलग ही दृश्य देखने को मिला, जिसने प्रशासन और आयोजन समिति की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महोत्सव में देवताओं के लिए लगाए गए पैगोडा शैली के टेंट को लेकर कई देवताओं ने खुली नाराजगी जाहिर की है।

सर्व देवता समिति के अध्यक्ष शिवपाल शर्मा का कहना है कि देवता के कारदारों को पहले ही बता दिया था और कारदार मान भी गए थे। प्रशासन द्वारा देवताओं के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं।ये देवता रहे नाराजदेव बनयूरी, देव सत्य नारायण, आदि ब्रह्मा, शैल पुत्री और ग्वाली कामेश्वर पैगोडा शैली के टेंट से बाहर बैठकर भक्तों को दर्शन दे रहें।

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