संवाददाता: राजेंद्र नेगी (रिकांगपिओ)
1. सेवा और समर्पण: रिकांगपिओ में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी का जन्मदिन बना जन-सेवा का उत्सव
रिकांगपिओ: हिमाचल प्रदेश सरकार के राजस्व एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी का जन्मदिवस आज जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में सादगी और जन-सेवा के प्रतीक के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर किसी बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के बजाय कार्यकर्ताओं ने जन-सरोकार के कार्यों को प्राथमिकता दी।
सुबह से ही रिकांगपिओ के क्षेत्रीय अस्पताल में कार्यकर्ताओं का तांता लगा रहा, जहाँ उन्होंने उपचाराधीन मरीजों से भेंट की और उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए ताजे फल और पौष्टिक आहार वितरित किए। स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जगत सिंह नेगी का राजनीतिक जीवन हमेशा जनजातीय क्षेत्रों के अधिकारों की रक्षा और उनके विकास के लिए समर्पित रहा है। अस्पताल परिसर के बाद स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। रिकांगपिओ बाजार और आसपास के क्षेत्रों में भी समर्थकों ने मिठाइयां बांटकर खुशियां मनाईं। मंत्री के समर्थकों का कहना है कि उनके नेतृत्व में किन्नौर ने विकास के नए आयाम छुए हैं।
2. संस्कृति की गूंज: कल्पा के ताता पानी में ‘तोशीम’ उत्सव ने दिखाया समृद्ध जनजातीय गौरव
कल्पा: आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बीच जिला किन्नौर के कल्पा क्षेत्र के ताता पानी में आयोजित ‘तोशीम’ उत्सव ने प्राचीन परंपराओं की जीवंत तस्वीर पेश की। यह उत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किन्नौर की सदियों पुरानी विरासत को आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा।
उत्सव के दौरान पूरी घाटी पारंपरिक वाद्ययंत्रों ‘ढोल-नगाड़ों’ और ‘करनाल’ की मधुर ध्वनियों से सराबोर हो गई। स्थानीय पुरुषों और महिलाओं ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों में सजकर प्राचीन ‘कायंग’ और ‘बकियांग’ नृत्य पेश किए, जिसे देखकर वहां मौजूद पर्यटक भी मंत्रमुग्ध हो गए। इस सांस्कृतिक मिलन में न केवल नाच-गाना हुआ, बल्कि पुराने लोक गीतों के माध्यम से किन्नौर के इतिहास और संघर्ष की गाथाएं भी सुनाई गईं। आयोजन समिति के सदस्यों का कहना है कि इस तरह के आयोजन ही हमारी असली पहचान हैं और इन्हें संरक्षित करना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
3. आर्थिकी का आधार: किन्नौर की घाटियों में सेब के नए बागानों की तैयारी, बागवानों ने झोंकी ताकत
किन्नौर: बर्फबारी के बाद खिली धूप के साथ ही जिला किन्नौर के बागवान अपनी आर्थिकी को नई दिशा देने के लिए खेतों और बगीचों में उतर आए हैं। जिले के निचले क्षेत्रों विशेषकर टापरी, निगुलसरी, और भावनगर में इन दिनों नए सेब के पौधे लगाने का काम जोरों पर चल रहा है।
सर्दियों में हुई बर्फबारी ने मिट्टी में जिस नमी का संचार किया है, उसे बागवान नए पौधों के लिए अमृत मान रहे हैं। कई प्रगतिशील बागवान अब पुरानी किस्मों के स्थान पर आधुनिक ‘रूटस्टॉक’ और ‘हाई-डेंसिटी’ प्लांटेशन को अपना रहे हैं, ताकि कम समय में बेहतर पैदावार ली जा सके। कृषि और बागवानी विभाग के विशेषज्ञों ने भी फील्ड में जाकर बागवानों को गड्ढे तैयार करने, उचित दूरी बनाए रखने और जैविक खाद के संतुलित प्रयोग के बारे में जागरूक करना शुरू कर दिया है। बागवानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह अनुकूल रहा, तो इस बार की रोपाई भविष्य में जिले की आर्थिकी को नया बल देगी।
