हिमाचल बीजेपी का ऑल पार्टी से वॉकआउट, बोले CM कर रहे राजनीति, सीएम बोले- मोदी के सामने अधिकारों की बात रखने से डर रही भाजपा

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शिमला, सुरेंद्र राणा; हिमाचल प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को लेकर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद सियासत गरमा गई। पहले विपक्ष ने सरकार को घेरा, फिर मुख्यमंत्री ने जवाबी हमला बोला।विपक्ष का पक्षबैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आरडीजी पर वित्त सचिव की प्रस्तुति में कई तथ्य भ्रामक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने पहले दिन से ही मिलकर काम करने का माहौल नहीं बनाया। जयराम ठाकुर ने कहा कि 12वें, 13वें और 14वें वित्त आयोग ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि आरडीजी आगे चलकर बंद हो सकती है, इसलिए सरकार को समय रहते अपने खर्च नियंत्रित करने और आय बढ़ाने पर काम करना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि आरडीजी सिर्फ एक राज्य की नहीं, बल्कि 17 राज्यों की बंद हुई है, इसलिए हिमाचल से भेदभाव के आरोप सही नहीं हैं।उधर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस सरकार अपनी नाकामियों का ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ने का प्रयास कर रही है और अपनी गारंटियों के दबाव में वित्तीय संकट का रोना रो रही है।

इसके बाद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बीजेपी के लिए प्रदेश हित से ज्यादा “कुर्सी हित” बड़ा है और पार्टी राजनीतिक रोटियां सेक रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने बीजेपी के कहने पर ही सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और उन्हीं के आग्रह पर बैठक का स्थान सचिवालय से बदलकर पीटरहॉफ (Peterhoff) किया गया, लेकिन बीजेपी विधायक उनकी बात सुने बिना ही बीच में बैठक छोड़कर चले गए।सीएम ने कहा कि केंद्र सरकार ने आरडीजी बंद की है, मगर हिमाचल बीजेपी में इसे बहाल कराने की मांग प्रधानमंत्री के सामने रखने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि बीजेपी साथ चले या नहीं, सरकार अपने हक की लड़ाई लड़ेगी। वहीं कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर ने सवाल उठाया कि बीजेपी साफ बताए—क्या वह आरडीजी बहाल करने के पक्ष में है या विरोध में?

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