शिमला, सुरेंद्र राणा: केद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश का राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने पर सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार खासी चिंता में है। सरकार ने RDG बंद होने पर विशेष सत्र भी बुला रही थी जिसे राज्यपाल ने मंजूरी नहीं दी और अब सरकार ने 16 फरवरी से बजट सत्र बुलाने का निर्णय लिया है जिसमें RDG और आगामी वित्त वर्ष के लिए सरकार बजट पेश करेगी।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि हिमाचल सरकार ने वित्तीय अनुशासन के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के राजस्व में इजाफा किया है जिसका जमीन पर असर दिखना भी शुरू हो गया है लेकिन इस बीच केंद्रीय बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को बंद कर दिया है जिसका हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। हिमाचल प्रदेश आर्थिक रूप से सम्पन्न राज्य नहीं है ऐसे में केंद्र की ग्रांट के बिना विकास प्रभावित होगा। हिमाचल भाजपा नेताओं को राजनीति छोड़कर प्रदेश हित में प्रधानमंत्री से मिलकर RDG की बहाली में सरकार का सहयोग करना चाहिए। हिमाचल सरकार भाजपतकर नेतृत्व में भी पीएम मोदी के पास चलने को तैयार है क्योंकि मामला जनता के हित से जुड़ा हुआ है।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने RDG को लेकर सरकार पर आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार हिमाचल की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर नहीं है। आरडीजी के बंद होने के बाद सरकार ने प्रदेश में पांच चेयरमैन नॉमिनेट किए हैं जिससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय प्रबंधन को लेकर सरकार कितनी गंभीर है।प्रदेश सरकार 16वे वित्त आयोग के समक्ष अपने खर्च और आय बढ़ाने को लेकर मजबूती से पक्ष नहीं रख पाई है जिस कारण आरडीजी बंद होने की जिम्मेदार सरकार है। केंद्रीय बजट में हिमाचल सहित 17 राज्यों का RDG को खत्म किया गया है ऐसे में हिमाचल सरकार को अपने खर्चे कम करने होंगे और आय के साधनों को मजबूत करना होगा।
इस बीच RDG को लेकर कल सुक्खू सरकार कैबिनेट मीटिंग भी बुलाई है। साथ ही कैबिनेट के बाद सरकार हिमाचल की आर्थिक स्थिति को लेकर विपक्ष को एक प्रेजेंटेशन देगा जिसमें RDG बंद होने के आगामी वर्षों में हिमाचल क्या क्या प्रभाव होंगे यह सांझा किया जाएगा। सर्वदलीय बैठक बुलाने पर भी सरकार आने वाले दिनों में विचार कर रही है।
