Punjab दस्तक ||हिमाचल का दिल्ली पर बड़ा पलटवार! बिजली प्रोजेक्ट्स पर टैक्स की तैयारी, 8 फरवरी की कैबिनेट में होगा ‘महा-फैसला

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सुरेंद्र राणा:हिमाचल प्रदेश की सियासत में इस समय ‘आर-पार’ की जंग छिड़ गई है। केंद्र सरकार द्वारा राज्य के ‘राजस्व घाटा अनुदान’ (RDG) पर कैंची चलाए जाने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अब ‘डिफेंस’ छोड़ ‘अटैक’ के मूड में आ गए हैं। Punjab दस्तक को विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि सरकार ने अब उन संसाधनों पर अपना कानूनी हक जताने की पूरी तैयारी कर ली है, जो दशकों से हिमाचल की जमीन और पानी का इस्तेमाल कर करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं।खजाने की खाली तिजोरी और ‘सुख’ का मास्टर प्लानविश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्र के वित्तीय झटके का जवाब ‘हिमाचल के स्वाभिमान’ से देने का मन बना लिया है। 8 फरवरी की कैबिनेट बैठक में जिस 2% भूमि राजस्व (Land Revenue) का प्रस्ताव लाया जा रहा है, वह महज एक टैक्स नहीं बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है। जानकारी मिली है कि इस फैसले से सरकारी खजाने में सालाना करीब ₹1,800 करोड़ से ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व आने की उम्मीद है। यह धनराशि उन विकास परियोजनाओं को संजीवनी देगी जो बजट की कमी के कारण अधर में लटकी थीं।क्यों खास है यह रणनीति?यह खबर इसलिए भी बड़ी है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली नवरत्न कंपनियों और BBMB पर वित्तीय बोझ पड़ेगा। अब तक हिमाचल केवल ‘रॉयल्टी’ पर निर्भर रहता था, लेकिन अब सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री ‘भूमि के मालिक’ के तौर पर अपना कानूनी हक मांगने की ओर बढ़ रहे हैं। यह कदम ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की उस कड़ी का हिस्सा है, जिसमें हिमाचल को 2032 तक आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।सदन के भीतर और बाहर छिड़ेगा संग्रामसूत्रों से यह भी संकेत मिले हैं कि सरकार 17 फरवरी के आसपास विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर केंद्र के “वित्तीय अन्याय” को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाएगी। 8 फरवरी को कैबिनेट के बाद होने वाली विधायक दल की बैठक में सभी मंत्रियों और विधायकों को इस ‘आर्थिक महासंग्राम’ के लिए तैयार रहने को कहा जाएगा। मुख्यमंत्री का यह दांव विपक्ष के लिए भी बड़ी चुनौती होगा, क्योंकि उन्हें अब प्रदेश के हितों और केंद्र की नीतियों के बीच अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

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