शिमला, सुरेंद्र राणा: केंद्र सरकार द्वारा रैवेन्यू डैफिसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद किए जाने के फैसले को लेकर प्रदेश में चल रही चर्चाओं के बीच लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने इसे हिमाचल प्रदेश के लिए एक बड़े वित्तीय संकट की शुरूआत बताते हुए कहा कि इससे आने वाले समय में विकास कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।लोक निर्माण मंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि संकट वही समय है जब दृढ़ निश्चय, सकारात्मक सोच और सशक्त नेतृत्व मिलकर असंभव को संभव बना देते हैं। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने का फैसला किसी एक दल या सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हर हिमाचलवासी के भविष्य से जुड़ा विषय है। यह कर्मचारियों और पैंशनर्ज की सुरक्षा, किसानों और मजदूरों की रोजी-रोटी, युवाओं के रोजगार और बच्चों की शिक्षा का सवाल है।विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल का बेटा होने के नाते वह प्रदेशवासियों को विश्वास दिलाते हैं कि सरकार इस संकट के आगे झुकने वाली नहीं है। लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर केंद्र सरकार से हिमाचल का हक तथ्यों और मजबूती के साथ लगातार मांगा जाएगा। उन्होंने दो टूक कहा कि पहाड़ी और आपदा प्रभावित राज्य के रूप में हिमाचल को विशेष आर्थिक संरक्षण मिलना उसका अधिकार है, कोई एहसान नहीं। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अपने संसाधनों, जलविद्युत, पर्यटन, बागवानी और सेवा क्षेत्रों को और सशक्त करेगी। नई राजस्व धाराओं के विकास के साथ-साथ फिजूलखर्ची पर सख्त नियंत्रण रखा जाएगा और हर रुपए का उपयोग जनता के हित में किया जाएगा। कर्मचारियों, पैंशनर्ज, किसानों, मजदूरों और युवाओं के हितों की रक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और इसमें कोई समझौता नहीं होगा।
