शिमला, सुरेंद्र राणा: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। इस बार उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए बोर्ड स्वयं शिक्षकों की तैनाती नहीं करेगा बल्कि शिक्षा विभाग से विषय विशेषज्ञों की सेवाएं लेगा। इसका उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है ताकि परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किए जा सकें और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या देरी से बचा जा सके।हर साल बोर्ड परीक्षा के परिणामों के घोषित होने में देरी हो जाती थी। इसका मुख्य कारण यह था कि कई शिक्षक आवेदन करने के बावजूद मूल्यांकन केंद्रों पर अनुपस्थित रहते थे। यह देरी न केवल छात्रों के लिए बल्कि उनके अभिभावकों और स्कूलों के लिए भी चिंता का कारण बनती थी। इस बार बोर्ड ने इस समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए शिक्षा विभाग से सीधे विषय विशेषज्ञों की तैनाती की योजना बनाई है। बोर्ड ने 5,031 विशेषज्ञों की मांग की है, जिसमें 2,901 विशेषज्ञ 10वीं कक्षा के लिए और 2,130 विशेषज्ञ 12वीं कक्षा के लिए होंगे। इसके साथ ही विशेषज्ञों को सीधे शिक्षा विभाग से नियुक्त किया जाएगा, जिससे मूल्यांकन कार्य में किसी भी प्रकार की रुकावट या मनमानी का कोई मौका नहीं रहेगा।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि इस बार 10वीं और 12वीं कक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए शिक्षा विभाग से एक्सपर्ट मांगे गए हैं, ताकि मूल्यांकन कार्य निर्धारित समय तक पूरा किया जा सके और परीक्षा परिणाम समय पर घोषित किए जा सकें। यह कदम प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और समयबद्ध परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
