शिमला, सुरेंद्र राणा: गणतंत्र दिवस परेड के लिए रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश के 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया था, जिनमें हिमाचल प्रदेश की झांकी भी शामिल रही। सोमवार को प्रस्तुत की गई हिमाचल प्रदेश की झांकी ने यह संदेश दिया कि प्रदेश केवल देवी-देवताओं की भूमि ही नहीं, बल्कि निडर देशभक्ति और वीरता की भी भूमि है।झांकी का मुख्य विषय हिमाचल प्रदेश की उस गौरवशाली परंपरा पर आधारित था, जिसमें देवभूमि के साथ-साथ ‘वीरभूमि’ के रूप में राज्य की पहचान को दर्शाया गया। इसमें प्रदेश के बहादुर बेटों और बेटियों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने साहस, बलिदान और अदम्य हौसले के साथ देश की रक्षा में योगदान दिया।हिमाचल प्रदेश ने देश को अब तक 1,203 वीरता पुरस्कार विजेता दिए हैं। इनमें चार परमवीर चक्र, दो अशोक चक्र और दस महावीर चक्र शामिल हैं, जो भारतीय सैन्य इतिहास में राज्य की असाधारण वीरता का प्रमाण हैं। झांकी के माध्यम से इसी अदम्य साहस और बलिदान की भावना को दर्शाया गया।झांकी में यह भी दिखाया गया कि हिमाचल प्रदेश का योगदान केवल अतीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वीरता और देशभक्ति आज भी यहां के लोगों के चरित्र और संस्कारों में रची-बसी है। रक्षा बलों में देश के प्रमुख योगदानकर्ताओं में शामिल हिमाचल की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।झांकी का उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि और उसकी गौरवशाली सैन्य परंपरा को एक साथ प्रस्तुत करना था। यह झांकी इस बात की सशक्त याद दिलाती है कि हिमाचल प्रदेश देवी-देवताओं के आशीर्वाद से पावन और निडर देशभक्ति से ओतप्रोत एक सच्ची ‘वीर भूमि’ है।
