शिमला, सुरेन्द्र राणा: केंद्र द्वारा रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद करने को प्रदेश की सुक्खू सरकार ने गंभीरता से लिया है। कांग्रेस इसे केंद्र का अलौकतांत्रिक फैसला करार दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र के इस फैसले से निपटने के लिए पूरी तैयारी शुरू कर दी है और समूचे फायनांस विभाग को हाई अलर्ट के साथ बेहतर वित्तीय प्रबंधन के निर्देश दिए हैं। साथ ही ऐसे संकेत भी मिलने लगे हैं कि सरकार कुछ बड़े फैसले भी ले सकती है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने एक हफ्ते के भीतर ही दूसरी बार कैबिनेट की बैठक बुला ली है। कैबिनेट की बैठक 12 फरवरी को बुलाई गई है और इसमें राज्य सरकार कुछ कड़े फैसले भी ले सकती है। आठ जनवरी यानी गत रविवार को भी कैबिनेट की बैठक हुई थी और उसके बाद प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार ने एक प्रजेंटेशन राज्य के वित्तीय हालत पर दी थी।इसमें वित्त विभाग ने राज्य सरकार से अगले वित्त वर्ष में सभी तरह की सबसिडी बंद करने के साथ-साथ कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को भी फ्रीज करने का सुझाव दिया है। दो साल से खाली पड़े पदों को अबॉलिश करने की सिफारिश भी की गई है। राज्य सरकार रिटायरमेंट ऐज बढ़ाने को लेकर चल रहे विचार को भी लंबे समय से टाल रही है, लेकिन अब कड़े फैसले लेने का वक्त है। हिमाचल सरकार ने बजट सत्र की शुरुआत 16 फरवरी से करने का निर्णय लिया है। इस सत्र के पहले हिस्से में भी राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के प्रभावों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पूरे मामले पर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार इसके लिए विपक्षी दल भाजपा से भी सहयोग चाहती है, लेकिन भाजपा नेताओं की ओर से अभी स्पष्ट तौर पर कुछ कहा नहीं गया है।
